‘श्री अमरनाथ यात्रियों’ की अडिग आस्था और साहस को ‘नमन’

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Monday, July 17, 2017-10:59 PM

जम्मू-कश्मीर में श्री अमरनाथ की यात्रा आस्था का ऐसा केंद्र है जहां देश भर से लोग कठिनाइयां झेल कर भोले बाबा को श्रद्धासुमन अॢपत करने पहुंचते हैं। ये श्रद्धालु ऐसे नि:शस्त्र वीर सैनिक हैं जो यहां देश की एकता-अखंडता मजबूत करने और इसकी रक्षा के लिए आते हैं। 

यह करोड़ों शिव भक्तों की आस्था का केंद्र ही नहीं यहां की अर्थव्यवस्था मजबूत करने का भी माध्यम है। इस समय जबकि प्रदेश की आय के मुख्य स्रोत पर्यटन का आतंकवाद के कारण भट्ठा बैठ चुका है, एक अमरनाथ यात्रा ही कश्मीर की अर्थव्यवस्था को कुछ सहारा दे रही है। इस यात्रा से जम्मू-कश्मीर सरकार को करोड़ों रुपए की आय के अलावा स्थानीय घोड़े, पिट्ठू व पालकी वाले भी अच्छी कमाई करते हैं। इसी आय से वे अपने बच्चों की शादियां या नए मकान बनाते व खरीदारी करते हैं। श्री अमरनाथ की पवित्र गुफा की पुनर्खोज बूटा मोहम्मद नामक एक नेक दिल मुसलमान गुज्जर ने की थी और यहां चढ़ाए जाने वाले चढ़ावे का एक हिस्सा आज भी बूटा मोहम्मद के परिजनों को दिया जाता है। 

यात्रा मार्ग में लखनपुर से गुफा तक 125 से अधिक स्वयंसेवक मंडलियां लंगर लगाकर रक्षाबंधन तक यहां श्रद्धालुओं के खाने-पीने, ठहरने, दवाओं आदि की नि:स्वार्थ भाव से सेवा करती हैं। इस वर्ष भी खराब मौसम और आतंकवादियों के हमलों की परवाह न करते हुए श्रद्धालु 29 जून से श्री अमरनाथ यात्रा के लिए निकल पड़े हैं जो रक्षा बंधन अर्थात 7 अगस्त तक जारी रहेगी। यात्रा के 11वें दिन 9 जुलाई तक 1,34,771 श्रद्धालु भोले बाबा के दरबार में नतमस्तक हो चुके थे हालांकि इस दौरान उन्हें कुछ कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ा। यात्रा के पहले दिन 29 जून को लखनपुर में श्रद्धालुओं की एक बस दुर्घटनाग्रस्त होने से 12 लोग घायल हो गए और 30 जून को आधार शिविरों बालटाल एवं पहलगाम में भारी वर्षा से यात्रा कुछ देर रोकनी पड़ी। 

जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर भी कई स्थानों पर भूस्खलन के कारण यात्रियों का तीसरा जत्था रोकना पड़ा तथा आतंकी बुरहान वानी की बरसी के कारण कश्मीर घाटी में व्याप्त तनाव के कारण भी 8 जुलाई को यात्रा रद्द की गई। परंतु इस यात्रा में 10 जुलाई रात को बहुत बड़ा व्यवधान पड़ा जब आतंकवादियों ने अनंतनाग जिले में एक यात्री बस पर हमला करके 8 लोगों की हत्या कर यात्रा के शांतिपूर्वक सम्पन्न होने का सिलसिला तोड़ दिया। हालांकि इसके बाद भी श्रद्धालुओं की आस्था और साहस नहीं डिगे तथा 18 दिनों में ही श्रद्धालुओं ने 2 लाख का आंकड़ा पार कर दिया। लेकिन 16 जुलाई को ही एक और दुर्भाग्यपूर्ण घटना में रामबन जिले की बनिहाल तहसील के नचलाना इलाके में श्रद्धालुओं से भरी एक बस खाई में गिर जाने से 17 लोगों की मृत्यु तथा 31 लोग घायल हो गए। 

यही नहीं, इस यात्रा के दौरान अब तक दिल का दौरा पडऩे या स्वास्थ्य सम्बन्धी अन्य तकलीफों से 7 श्रद्धालुओं की मृत्यु के बावजूद यात्रा अनवरत जारी है परंतु सुरक्षा प्रबंधों में कुछ चूकें भी हुई हैं। हमले की शिकार बस न ही अमरनाथ यात्रा के काफिले का हिस्सा थी और न ही अमरनाथ श्राइन बोर्ड में पंजीकृत थी। शाम 5.00 बजे सभी यात्री बसों की यात्रा रोक देने के आदेशों के बावजूद उस बस द्वारा यात्रा जारी रखना और सुरक्षा बलों द्वारा उसे न रोकना सुरक्षा प्रबंधों में भारी चूक दर्शाता है। इसी प्रकार रामबन से बनिहाल के बीच 36 किलोमीटर का इलाका जहां बस 16 जुलाई को खाई में गिरी, दुर्घटनाओं के प्रति अत्यंत संवेदनशील है। यहां सड़क काफी समय से बेहद खराब है। यहां कम से कम एक दर्जन स्थानों पर ट्रैफिक जाम लगे रहते हैं तथा पुलिस द्वारा ट्रैफिक प्रबंधन भी असंतोषजनक है। 

इतना ही नहीं अनेक स्थानों पर जमीन धंस चुकी है और यहां भूस्खलन भी आम होते रहते हैं। वाहन चालकों के अनुसार सड़क के इस टुकड़े को पार करना किसी दु:स्वप्र से कम नहीं है। अत: इस यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए जहां उक्त त्रुटियों को दूर करने की जरूरत है वहीं अपनी सुरक्षा को दरपेश आतंकवादी खतरे और अन्य प्राकृतिक जोखिमों की परवाह न करते हुए श्रद्धालुओं का उमड़ता सैलाब इस तथ्य का मुंह बोलता प्रमाण है कि जन आस्था के आगे ये खतरे कुछ भी नहीं! भोले बाबा के ये श्रद्धालु सही अर्थों में देश की एकता और अखंडता के ध्वजवाहक, शांतिदूत और अडिग आस्था के प्रतीक हैं। ये राष्ट्रविरोधी तत्वों को स्पष्टï संदेश देते हैं कि देश को तोडऩे की उनकी कोशिशें कभी सफल न होंगी, अत: इनके साहस को जितना भी नमन किया जाए कम है।—विजय कुमार

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