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पाकिस्तान की दुर्दशा पर ‘अब परवेज मुशर्रफ का रोना’

  • पाकिस्तान की दुर्दशा पर ‘अब परवेज मुशर्रफ का रोना’
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Wednesday, February 14, 2018-1:44 AM

भारत के साथ तीन युद्धों के बाद नवाज शरीफ ने 21 फरवरी, 1999 को श्री वाजपेयी को लाहौर आमंत्रित करके आपसी मैत्री व शांति के लिए लाहौर घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए परंतु सेनाध्यक्ष परवेज मुशर्रफ ने न तो श्री वाजपेयी को सलामी दी और न ही श्री वाजपेयी के सम्मान में दिए भोज में शामिल हुआ। 

यही नहीं, मई 1999 में कारगिल पर हमला करके 527 भारतीय सैनिकों को शहीद करवाने व पाकिस्तान के 700 सैनिकों को मरवाने के पीछे भी परवेज मुशर्रफ का ही हाथ था। बाद में उसी नवाज का तख्ता पलट कर उसे जेल में डालने के बाद देश निकाला भी दे दिया जिसने उसे पाकिस्तान का सेनाध्यक्ष बनाया था और स्वयं शासक बन बैठा। 20 जून, 2001 से 18 अगस्त, 2008 तक पाकिस्तान का राष्ट्रपति रहा परवेज मुशर्रफ 2001 में श्री वाजपेयी से वार्ता के लिए भारत आया परन्तु वार्ता अधूरी छोड़ कर ही आगरा से वापस पाकिस्तान चला गया। 

वर्ष 2007 में बेनजीर भुट्टो की हत्या में संलिप्तता व संभावित गिरफ्तारी से बचने के लिए वह 18 अगस्त, 2008 को त्यागपत्र देकर पाकिस्तान से खिसक गया तथा इस समय दुबई में स्व-निर्वासन का जीवन बिता रहा है। अतीत में ओसामा बिन लाडेन, अल जवाहिरी तथा हक्कानी को पाकिस्तान के हीरो बता चुके मुशर्रफ ने तालिबान तथा लश्कर जैसे आतंकवादी संगठनों को पाकिस्तान द्वारा धन तथा प्रशिक्षण दिए जाने की बात भी स्वीकार की और मुम्बई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद की खुल कर प्रशंसा की। मुशर्रफ जैसों की आतंकवाद समर्थक नीतियों के कारण ही आज पाकिस्तान की यह हालत हो गई है कि इसी के पाले आतंकवादी जहां भारत विरोधी गतिविधियों में जुटे हुए हैं वहीं उन्होंने पाकिस्तान में भी ङ्क्षहसा तेज कर दी है। 

6 महीनों के दौरान वहां 40 से अधिक बड़े आतंकी हमले हो चुके हैं जिनमें 225 से अधिक लोग मारे गए हैं। आतंकी गिरोह पर्यटन स्थलों, बाजारों, शॉपिंग मॉल्स, सैन्य व सरकारी संस्थानों, हवाई अड्डों, विश्वविद्यालयों, स्कूलों, अस्पतालों, धार्मिक स्थलों आदि को निशाना बना रहे हैं। विश्व समुदाय में पाकिस्तान की बदनामी का उल्लेख करते हुए अभिनेत्री सबा कमर ने टी.वी. इंटरव्यू के दौरान फूट-फूट कर रोते हुए कहा कि ‘‘जब हम विदेश जाते हैं तो जिस तरह हमारी चैकिंग होती है, मैं बता नहीं सकती।’’ ‘‘मैं जार्जिया गई तो हवाई अड्डों पर मेरे पासपोर्ट के कारण मुझे रोक लिया गया कि मैं पाकिस्तान से हूं। मेरी पूरी जांच और इंटरव्यू के बाद मुझे जाने दिया गया। उस दिन मुझे अहसास हुआ कि यह इज्जत है हमारी?’’ 

अब पाकिस्तान की इसी स्थिति पर आंसू बहाते हुए परवेज मुशर्रफ ने कहा है कि ‘‘आज देश के हालात देखकर दिल खून के आंसू रोता है। देश में अमन-शांति और कानून नाम की कोई चीज नहीं है। हर समुदाय के लोग दुखी हैं। किसी की प्रतिष्ठा सुरक्षित नहीं है। अल्पसंख्यक समुदाय के लोग परेशान हैं। लगता है कि देश में कोई सरकार है ही नहीं।’’ उक्त बातें कहते हुए मुशर्रफ यह भूल गया है कि नवाज शरीफ तो भारत के साथ शांतिपूर्वक रहना चाहते थे परन्तु उस जैसे लोगों के कारण ही ऐसा संभव न हो सका। इसी कारण अब सिंध, उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत और पाक अधिकृत कश्मीर आदि में पाकिस्तान से अलग होने की मांग उठ रही है तथा पाकिस्तान विरोधी प्रदर्शन भी लगातार हो रहे हैं। बंगलादेश, नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका आदि देशों की भांति भारत ने तो पाकिस्तान के साथ भी अच्छे संबंधों की स्थापना के लिए भरसक प्रयास किए तथा पाक अधिकृत कश्मीर के लिए बस सेवा और लाहौर के लिए रेल सेवा भी शुरू की परंतु सब व्यर्थ गया। 

इसी का नतीजा है कि आज जहां कश्मीर में पाक समर्थितहिंसा का तांडव जारी है, वहीं पाकिस्तान भी अपनी ही लगाई हुई आतंकवाद की आग में झुलस रहा है। पाकिस्तान की ऐसी हालत को देख कर जहां अमरीका ने उसे सहायता रोक दी है, वहीं अंतर्राष्ट्रीय दबाव के आगे झुकते हुए पाकिस्तान सरकार आतंक के खिलाफ कानून में अहम बदलाव करने को विवश हुई है ताकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से प्रतिबंधित व्यक्तियों और लश्कर-ए-तोयबा, अल-कायदा व तालिबान जैसे संगठनों के विरुद्ध कार्रवाई कर सके। ऐसे में मुशर्रफ द्वारा पाकिस्तान की दुर्दशा पर आंसू बहाने पर यही टिप्पणी की जा सकती है कि : सब कुछ लुटा के होश में आए तो क्या किया।—विजय कुमार

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