खुदरा महंगाई दर 16 महीने के उच्च स्तर पर रुलाने लगे टमाटर-प्याज के दाम

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Saturday, January 13, 2018-11:47 PM

सरकार के दावों के बावजूद लोगों को महंगाई से राहत मिलने के आसार कम ही नजर आते हैं। खाद्य वस्तुओं, अंडों और सब्जियों के दाम बढऩे से दिसम्बर में खुदरा मुद्रास्फीति की दर बढ़कर 5.21 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

इससे निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें धूमिल हुई हैं।  यह आंकड़ा 16 महीने में सबसे ज्यादा है। उल्लेखनीय है कि नवम्बर में खुदरा महंगाई दर 4.88 प्रतिशत पर थी।
सैंट्रल स्टैटिस्टिक्स आफिस (सी.एस.ओ.) की ओर से 12 जनवरी को जारी आंकड़ों के अनुसार सब्जियों में सबसे ज्यादा महंगाई दर्ज की गई है। महंगाई पर सब्जियों की कीमतें बढऩे का असर दिखा है।

अक्तूबर में कंज्यूमर प्राइस बेस इंडैक्स (सी.पी.आई.) आधारित महंगाई 3.58 प्रतिशत के स्तर पर रही थी, वहीं नवम्बर 2016 में यह आंकड़ा 3.63 प्रतिशत रहा था। खुदरा महंगाई का पिछला उच्चतम स्तर 2016 अगस्त में रहा था, जब सी.पी.आई. 5.05 प्रतिशत रहा था।

महंगाई बढऩे की वजह सब्जियों के दाम में लगातार उछाल बताया जा रहा है। खासतौर पर प्याज और टमाटर के दाम जुलाई के बाद लगातार ऊंचे स्तर पर हैं और जुलाई वह महीना था जब महंगाई दर सबसे निचले स्तर पर थी।

यहां यह बात भी उल्लेखनीय है कि केंद्र में जब वाजपेयी जी की सरकार थी तो 1998 में भी प्याज की कीमतों ने रुलाना शुरू कर दिया था तब सरकार ने कई तरह की कोशिशें कीं। ये ऊंट के मुंह में जीरा ही साबित हुईं और जब चुनाव हुआ तो दिल्ली में मुख्यमंत्री सुषमा स्वराज के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार बुरी तरह हार गई थी।

उल्लेखनीय है कि सरकार ने आर.बी.आई. को महंगाई दर 4 प्रतिशत तक बनाए रखने का जिम्मा दिया है यह इससे 2 प्रतिशत ज्यादा या कम भी हो सकती है अगर इसमें आने वाले महीनों में बढ़ौतरी होती है तो रिजर्व बैंक को ब्याज की दरों में वृद्धि करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।     —विजय कुमार 

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