उत्तर प्रदेश की चुनावी दिलचस्पियां पति के विरुद्ध पत्नी और मां के विरुद्ध बेटा और एक नेत्रहीन भी मैदान में

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Friday, February 17, 2017-12:16 AM

शेष 2 चुनावी राज्यों उत्तर प्रदेश और मणिपुर में चुनाव प्रक्रिया जारी है जो 8 मार्च को सम्पन्न होगी और 11 मार्च को परिणाम आएंगे। हम आपको चुनावों की दिलचस्प बातें बताते आ रहे हैं तथा चंद नई बातें निम्र में दर्ज हैं :

उत्तर प्रदेश के चुनावों में बुजुर्ग पीढ़ी लगभग गायब दिखाई दे रही है न ही सोनिया गांधी चुनाव प्रचार करने आईं और न ही सपा नेता मुलायम सिंह यादव सक्रिय हुए। अलबत्ता उन्होंने अपने भाई शिवपाल यादव (इटावा) और छोटी बहू अपर्णा यादव (लखनऊ) के लिए चुनाव रैली को संबोधित अवश्य किया है।

किसी समय ‘सपा’ के स्टार प्रचारक रहे अमर सिंह, अभिनेत्री जयाप्रदा और ‘भाजपा’ के शत्रुघ्न सिन्हा भी चुनाव प्रचार से गायब हैं। मथुरा के लोगों को इस बात का अफसोस है कि उन्होंने लोकसभा चुनावों में हेमा मालिनी को जिताया। इसका खमियाजा मथुरा से भाजपा प्रत्याशी श्रीकांत शर्मा को भुगतना पड़ रहा है क्योंकि मथुरा के मतदाताओं ने श्रीकांत शर्मा पर भी ‘बाहरी’ का ठप्पा लगा दिया है (क्योंकि वह पार्टी के काम से दिल्ली में रहते हैं)। लोगों का कहना है कि ‘‘हेमा को चुनना हमारी बड़ी गलती थी। इस बार किसी ‘दिल्ली वाले’ को विधायक चुन कर हम वह गलती नहीं दोहराएंगे।’’

9 महीने की गर्भवती अर्चना बिश्नोई का 10 फरवरी को सिजेरियन आप्रेशन होना था परंतु उसने डाक्टरों से कह कर आप्रेशन की तिथि आगे बढ़वा ली ताकि 11 फरवरी को मतदान करके एक मिसाल पेश कर सके।आगरा की श्वेता ने 10 फरवरी को अपनी शादी के बाद 11 फरवरी को विदाई के लिए ससुराल रवाना होने से पूर्व मतदान केंद्र पर जाकर वोट डाला। इस अवसर पर श्वेता के साथ मतदान केंद्र जाने वालों में उसकी सास भी थी।

मथुरा में ही एक 115 वर्षीय बुजुर्ग महिला लाटो को चारपाई पर डाल कर मतदान केंद्र पर लाया गया। वह प्रदेश में सर्वाधिक बुजुर्ग मतदाता हैं। बाद में उन्होंने कहा, ‘‘मैंने कभी सोचा नहीं था कि यह दिन देखने के लिए मैं जीवित रहूंगी।’’ इसी दिन मेरठ में पालसी (दिमागी लकवा) जैसे गंभीर रोग से पीड़ित दो जुड़वां भाई पीयूष गोयल और आयुष गोयल पहली बार मतदान करने के लिए मतदान केंद्र पहुंचे। एक भाई ने तो किसी राजनीतिक दल के उम्मीदवार को वोट डाला परंतु दूसरे भाई की पसंद का कोई उम्मीदवार न होने के कारण उसने ‘नोटा’ विकल्प चुना।

सहारनपुर से निर्दलीय उम्मीदवार 62 वर्षीय ïिशव कुमार गुप्ता नेत्रहीन हैं तथा रेलगाडिय़ों में चूर्ण बेचते हैं। साधनों के अभाव में उन्होंने रिक्शा पर अपना चुनाव प्रचार किया। उन्होंने अपनी सम्पत्ति मात्र 5,000 रुपए बताई है। देवबंद से ‘सपा’ के उम्मीदवार ‘माविया अली’ के विरुद्ध निर्दलीय चुनाव लड़ रही उनकी पत्नी ‘जहीर फातमा’ ने ही ताल ठोक दी है। इससे पहले 2016 के उपचुनाव में भी उसने अपने पति के विरुद्ध चुनाव लड़ा था और उसे अपने पति की 51,000 वोटों के मुकाबले में सिर्फ 455 वोट मिले थे।

इलाहाबाद जिले में हांडिया विधानसभा सीट पर मां-बेटे की जोड़ी एक-दूसरे के विरुद्ध चुनाव लड़ रही है। पूर्व मंत्री राकेशधर त्रिपाठी की पत्नी प्रोमिला देवी के मुकाबले पर उनका बेटा प्रभात खड़ा है। इलाहाबाद पश्चिम सीट पर मुख्य मुकाबला 2 महिलाओं में है। पूजा पाल (बसपा) ने 2005 में अपने पति राजू पाल की हत्या के बाद राजनीति में कदम रखा। उन्हें टक्कर दे रही हैं रिचा सिंह (सपा) जो देश की स्वतंत्रता के बाद चुनी जाने वाली इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ की पहली महिला अध्यक्ष हैं।

इन चुनावों में भाग्य आजमा रही कुछ छोटी पाॢटयों के नाम काफी दिलचस्प हैं जिनमें ‘महिला सशक्तिकरण पार्टी’, ‘ब्रज क्रांतिदल’, ‘भारतीय वंचित समाज पार्टी’, ‘किसान मजदूर सुरक्षा पार्टी’, ‘भारतीय भाईचारा पार्टी’, ‘पीस पार्टी’, ‘निषाद पार्टी’ महान दल आदि शामिल हैं।उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवार खड़े हैं जिन्हें चुनाव आयोग ने टैलीविजन, एयरकंडीशनर , रूम कूलर, वैक्यूमक्लीनर, रोड रोलर, नारियल, हार्मोनियम, गैस सिलैंडर इत्यादि दिलचस्प चुनाव चिन्ह दिए हैं। उत्तर प्रदेश के पहले दो चरणों के चुनाव सम्पन्न होने तक कुछ इस तरह के रंग देखने को मिले हैं। आने वाले दिनों में चुनावी राज्यों का हाल हम आपको अगले लेखों में भी बताएंगे।     —विजय कुमार 


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