कार खरीदने वालों के लिए अच्छी खबर

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Sunday, October 09, 2016-1:43 PM

नई दिल्लीः वाहन उद्योग के लिए कच्चे माल की कीमतों में बढ़ौतरी तथा कंपनियों के भारत स्टेज (बीएस) 6 प्रौद्योगिकी पर निवेश के बावजूद फिलहाल कारों की कीमतों में बढ़ौतरी के आसार नहीं है। वाहन निर्माता कंपनियों के संगठन सियाम का मानना है कि अगले साल अप्रैल से वस्तु एवं सेवा कर (जी.एस.टी.) लागू होने से उद्योग पर कर का बोझ कुछ कम होगा। इससे कंपनियों पर दबाव कम होगा तथा उन्हें कीमत बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।  

इसका एक दूसरा पहलू भी है- जी.एस.टी. लागू होने के बाद कारें तथा अन्य वाहनों के सस्ता होने की उम्मीद लगाए बैठे ग्राहकों को सियाम के इस बयान से निराशा हो सकती क्योंकि यदि इनके दाम बढ़ेंगे नहीं तो घटने की उम्मीद भी नहीं है। सियाम के उपमहानिदेशक सुगातो सेन ने बताया कि आम तौर पर नए वित्त वर्ष में होने वाली बढ़ौतरी अगले साल अप्रैल में नहीं देखने को मिलेगी। उन्होंने कहा कि हालांकि वाहन उद्योग में इस्तेमाल किए जाने वाले कच्चा माल जैसे हॉट रोल्ड इस्पात, कोल्ड रोल्ड इस्पात, पिग आयरन, वर्जिन एल्यूमीनियम, पॉली प्रोपाइलिन तथा प्राकृतिक रबड़ के दाम इस साल बढ़े हैं लेकिन जी.एस.टी. के लागू होने से वाहनों पर कर का प्रतिशत कम होने की उम्मीद है जिससे दाम बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 

उल्लेखनीय है कि लगभग सभी प्रमुख कंपनियों ने इस साल जुलाई-अगस्त में कारों तथा उपयोगी वाहनों के दाम औसतन 20 हजार रुपए तक बढ़ाए थे। सेन ने बताया कि फिलहाल कारों तथा उपयोगी वाहनों के दाम में उत्पाद लागत का 80 प्रतिशत तक कर तथा शुल्क जुड़ जाते हैं जिससे ये महंगे हो जाते हैं। यानी 18 लाख की कार में तकरीबन 8 लाख कर के रूप में शामिल होता है। हालांकि, छोटी कारों के मामले में कर एवं शुल्क का प्रतिशत उत्पादन लागत का 40 से 50 प्रतिशत तक होता है। 

जी.एस.टी. में कर की मानक दर 18 प्रतिशत के आसपास रहने की उम्मीद है जबकि विलासिता वाली वस्तुओं पर 36 से 40 प्रतिशत तक कर लग सकता है लेकिन जी.एस.टी. एकल कर प्रणाली होगी। इसका मतलब यह है कि कई प्रकार के करों की जगह इसमें एक ही कर देना होगा। सियाम की मांग है कि छोटी कारों एवं उपयोगी वाहनों, वाणिज्यिक वाहनों तथा दुपहिया एवं तिपहिया वाहनों पर मानक दर लगाया जाए तथा बड़ी कारों एवं उपयोगी वाहनों पर इससे 8 फीसदी ज्यादा कर लगाया जाए।  इसके अलावा ई.एम.आई. पर कार लेने वालों को रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत दरों में 0.25 प्रतिशत कटौती का फायदा भी मिलेगा। बैंकों ने इसके बाद अपनी आधार दरें घटानी शुरू कर दी है जिससे कार, आवास तथा अन्य ऋणों की ई.एम.आई. कम होगी। 


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