भारत-पाक सीमा पर कंटीली तार लगने के बावजूद पंजाब में नहीं रुकी हथियारों और ड्रग्ज की तस्करी

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Thursday, December 07, 2017-3:29 AM

विश्व के सभी देशों की सीमाओं को सुरक्षित रखने के लिए शासकों को कड़ी मेहनत करनी पड़ती है जो कई बार शासकों के लिए सिरदर्दी का कारण भी बन जाती है। कभी-कभी यह समस्या बड़ी गम्भीर बन जाती है जब पड़ोसी देश दुश्मन की भूमिका में एक-दूसरे देश के भीतर गहरे षड्यंत्र रचने पर उतर आते हैं। 

दूसरे विश्व युद्ध के पश्चात सीमा की समस्याएं यूरोप के विभाजन के कारण नए सिरे से उभरीं और बर्लिन जैसी प्रसिद्ध दीवार सीमा सील करने के लिए खड़ी करनी पड़ी। विश्व में ऐसा कोई भी देश नहीं होगा जिसकी सीमाएं पूर्ण रूप से सुरक्षित हों। भारत-पाक के बीच कटु रिश्तों से दोनों देशों की सीमाएं प्राय: समाचार पत्रों की सुर्खियों में छाई रहती हैं। भारत करोड़ों रुपए खर्च करके भी अपनी सीमा को पूरी तरह सील नहीं कर पाया। पंजाब में हिंसक आंदोलन शुरू होने के पश्चात भारत-पाक सीमा गर्मा-गर्म बहस का विषय भी अवश्य रही। कई बार ऐसा लगता था कि शस्त्र तस्करी से बढ़ते तनाव को देखते हुए दोनों देश युद्ध के मुहाने पर खड़े हैं। 


सीमा सुरक्षा बल के एक उच्चाधिकारी ने बताया कि भारत ने हिन्द-पाक सीमा पर चौकसी बेहद बढ़ा दी है। विशेष रूप से पंजाब के साथ लगती 554 किलोमीटर लम्बी सीमा पर सीमा सुरक्षा बल की संख्या में बड़े स्तर पर बढ़ौतरी की गई है। इस फोर्स को अति आधुनिक शस्त्रों से लैस किया गया है जिससे वह धुंध और अंधेरी रात में भी साफ देख सके। आधुनिक शस्त्रों के उपलब्ध होने के कारण वे घुसपैठियों और तस्करों का बड़ी आसानी से मुकाबला कर सकते हैं। फ्लड लाइट, मर्करी बल्ब, दूर से देखने वाले आधुनिक कैमरे एवं दूरबीन।

इसके अतिरिक्त 500 मीटर के सीमावर्ती क्षेत्रों में रात्रि का कफ्र्यू लगा रहता है। इस क्षेत्र में सीमा सुरक्षा बल की अनुमति के बिना दिन में भी कोई किसान कंटीली तारों के पार खेतों तक नहीं पहुंच सकता। किसानों को कंटीली तारों के पार जाने के लिए पहचान पत्र जारी किए गए हैं। गृह विभाग भारत सीमा को पूरी तरह से सील करने के लिए और कई व्यापक योजनाएं तैयार करने में लगा हुआ है। भारतीय सुरक्षा एजैंसियों का मानना है कि सीमा सुरक्षा बलों के ईमानदार प्रयत्नों और कंटीली तार लगाने के बावजूद सीमा पूरी तरह गैर कानूनी आवाजाही से मुक्त नहीं हो पाई। 

कई जूनियर अफसरों ने बताया कि कंटीली तार लगाने के साथ-साथ बढिय़ा रक्षा साजो-सामान कहीं अच्छे परिणाम ला सकता है। कई सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि 12-14 फुट ऊंची कंटीली तार लोहे की विशेष सीढिय़ों से बड़ी आसानी से पार की जा सकती है यद्यपि रात्रि के समय इन कंटीली तारों में बिजली का हाई वोल्टेज करंट छोड़ा जाता है। कंटीली तार लगने के पश्चात तस्करों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। उनका अधिकतर माल या तो पकड़ा गया या फिर तस्करी करने वाले लोग सीमा सुरक्षा बलों की फायरिंग से मारे गए। गृह विभाग ने पिछले जो आंकड़े प्रस्तुत किए हैं वे काफी चौंकाने वाले हैं। 2016-2017 (अप्रैल तक) सीमा सुरक्षा बल सीमावर्ती क्षेत्रों में 6000 से ज्यादा घुसपैठियों को ढेर कर चुका है और बड़े पैमाने पर अवैध शस्त्र और नशीले पदार्थों को पकड़ चुका है। 

परन्तु इससे एक प्रश्न अवश्य उठता है कि जो घुसपैठिए पकड़े नहीं गए उनकी संख्या तो 10000 के पार होगी। स्पष्ट है कि कंटीली तार लगाए जाने के बावजूद घुसपैठ की घटनाएं कम होती दिखाई नहीं देतीं बल्कि बड़ी ङ्क्षचता का विषय बनती जा रही हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत हिन्द-पाक सीमा को पूरी तरह सील करना चाहता है तो सुरक्षा पट्टी बनाने की जरूरत है। कई राजनीतिक पार्टियां भी पिछले दिनों ऐसी मांग कर रही थीं। सुरक्षा पट्टी का अभिप्राय: है कि लाखों की संख्या में सीमा पर बसे लोगों का पलायन करके उन्हें किसी सुरक्षित स्थान पर बसाया जाए। व्यय की दृष्टि से यह प्लान इतना महंगा था कि इसे सिरे नहीं चढ़ाया गया।

यह बात अति उल्लेखनीय है कि 1965 की पाकिस्तानी घुसपैठ के पश्चात यह फार्मूला जम्मू-कश्मीर के 2 जिलों पुंछ और राजौरी में अपनाया गया था जिससे सरकार को भारी नुक्सान का सामना करना पड़ा था। 1974 में सरकार ने इसे वापस ले लिया। केन्द्रीय सरकार जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती लोगों को अपने विश्वास में लेना चाहती थी। यदि देखा जाए तो पंजाब के साथ लगती हिन्द-पाक सीमा की भौगोलिक स्थिति ही ऐसी है कि सीमा सुरक्षा बल के लिए सीमा की सुरक्षा करना एक अत्यंत कठिन कार्य है।

अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर, गुरदासपुर के सीमावर्ती क्षेत्रों में तस्करों ने बड़ी-बड़ी कोठियां बना रखी हैं। पिछले 40 वर्षों के इतिहास पर पैनी दृष्टि डाली जाए तो इन तस्करों में से कई लोग राजनीति में आए और मंत्री पदों पर आसीन हुए। वर्षों से काम करने वाली तस्कर लॉबी अब इतनी शक्तिशाली हो चुकी है कि सीमा सुरक्षा बल के जवान भी इनकी चुनौती का सामना नहीं कर सकते। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन तस्करों की बदौलत पंजाब के मेहनती, परिश्रमी, ईमानदार किसान जोकि सीमावर्ती क्षेत्रों में बसे हुए हैं, का एक बड़ा हिस्सा नोटों के लालच में आकर इनके नशीले पदार्थों एवं अवैध शस्त्रों को ढोने में लगा हुआ है।

सीमा सुरक्षा बल के एक बड़े अधिकारी ने बताया कि हमारे विभाग में भी कई गंदी मछलियां विद्यमान हैं। हुसैनीवाला सीमा के निकट सीमा सुरक्षा बल के कमांडैंट बी.एस. हरि को एसीटिल एन्हाईड्राइड की तस्करी के लिए पकड़ा गया था। उन्होंने आगे बताया कि सीमा सुरक्षा बल के कई जूनियर अधिकारी पैसों के लालच के कारण तस्करों से अपने संबंध बना लेते हैं और अपनी ड्यूटी में इधर का माल उधर करने की पेशकश करते हैं। पिछले दिनों ममदोट सीमावर्ती क्षेत्र में मक्खन सिंह किसान के गड्डे में से करोड़ों रुपए की अफीम पकडऩे में सीमा सुरक्षा बल सफल रहा। सीमा के पार खेती करने के बहाने जाते छोटे-छोटे किसान केवल और केवल तस्करी में लगे हुए हैं। पिछले दिनों में ममदोट क्षेत्र में तस्करों द्वारा बनाई गई बड़ी-बड़ी सुरंगें पकड़े जाने के पश्चात सुरक्षा एजैंसियां सकते में आ गई हैं।

पिछले दिनों आर.एस.एस. अधिकारियों एवं कार्यकत्र्ताओं की हत्याओं को लेकर अकाली-भाजपा सरकार और कांग्रेस सरकार जिस तरह असफल रही, उससे लगता है कि पंजाब में अवैध शस्त्रों की बढ़ती सप्लाई को लेकर सीमा सुरक्षा बलों की भूमिका पर प्रश्रचिन्ह पुन: खड़ा किया जा रहा है। पंजाब में अवैध शस्त्रों का जखीरा आखिर पड़ोसी देश से तस्करी के माध्यम से पहुंच रहा है जहां पड़ोसी राज्यों से पंजाब में पहुंचाया जा रहा है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार राजस्थान में कंटीली तार पूरी तरह सुरक्षित होने के कारण वहां पर आतंकवादी गतिविधियों को लगाम मिली है और तस्करों के हौसले पस्त दिखाई देते हैं लेकिन सीमा सुरक्षा बलों के अनुसार जंगली जानवरों से टकराने के कारण कंटीली तारों को बहुत नुक्सान पहुंचता है जिसका लाभ प्राय: तस्कर कभी-कभी उठा लेते हैं। सीमा सुरक्षा बल के अधिकारियों का कहना है कि जब सतलुज में पानी की कमी हो जाती है तो घुसपैठ की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।-सुभाष आनंद

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