‘स्पेक्ट्रम मंहगा हुआ तो स्टेट बैंक खरीदने के लिए कर्ज नहीं देगा’

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Saturday, August 17, 2013-10:35 AM

नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने कहा कि यदि दूरसंचार क्षेत्र के लिए स्पेक्ट्रम बिक्री में 3जी स्पेक्ट्रम की तरह दाम काफी ऊंचे रहते हैं तो शायद इसकी खरीद के लिए बैंक ऋण नहीं दे, क्योंकि इस तरह के कर्ज को बिना गारंटी वाला असुरक्षित ऋण माना जाता है। स्टेट बैंक को आशंका है कि बिना गारंटी वाले ऋण जोखिम को देखते हुए उसे अधिक प्रावधान करना होगा जिसका बैंक की क्रेडिट रेटिंग पर प्रतिकूल असर हो सकता है।

 

स्टेट बैंक ने दूरसंचार नियामक ट्राई के स्पेक्ट्रम मूल्य निर्धारण के संबंध में कहा ‘‘बैंकों के बही-खाते में असुरक्षित ऋण रखने का भारी नुकसान होगा ‘यदि भविष्य में स्पेक्ट्रम कीमत अधिक होती है जैसा कि 3जी मामले में हुआ था तो बैंक बिना जमानत वाले ऋण के स्वरूप को देखते हुए इन कारोबारी योजनाओं के लिए धन मुहैया कराने की स्थिति में नहीं होगा।’’ 3जी स्पेक्ट्रम की नीलामी 2010 में की गई थी और इससे सरकारी खजाने में 67,000 करोड़ रुपए आए थे।

 

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकार (ट्राई) ने स्पेक्ट्रम के लिए इससे पहले 2008 तक दूरसंचार कंपनियों द्वारा अदा की जाने वाली राशि के मुकाबले 11 गुना कीमत तय की है। नियामक ने नंवबर 2012 में हुई स्पेक्ट्रम नीलामी के लिए न्यूनतम मूल्य तय करने के सबंध में 3जी मूल्य को पैमाना बनाया था।


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