सोना गिरवी रख सरकार बचाएगी अपनी साख!

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Wednesday, August 28, 2013-12:18 PM

नई दिल्ली: सरकार के हाथों से देश की अर्थव्यवस्था निकलती जा रही है। रुपये की कीमत डॉलर के मुकाबले 68 के पार जा चुकी है। रुपया के दुनिया में सबसे खराब परफॉर्म करने वाली करंसियों में शामिल हो चुका है। करंट अकाउंट डेफिसिट देश के लिए बड़ी समस्या बन सकता है। खाद्य सुरक्षा बिल की वजह से सरकारी खर्च बढऩे के चलते देश की रेटिंग घटने की पूरी आशंका है। शेयर बाजार में भी भारी गिरावट दर्ज की गई।

सेंसेक्स में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज 17500 के नीचे चला गया है। निफ्टी में भी आज150 अंकों से ज्यादा की गिरावट हुई। सोने की कीमत भी लगातार बढ़ रही है। घरेलू सराफा बाजार में सोने की कीमत 34 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। रिपोर्ट है कि अगले महीने से डीजल की कीमत प्रति लीटर 3 से 4 रुपये और सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलिंडर की कीमत में10 रुपये बढ़ौतरी हो सकती है।

ये तमाम नकारात्मक संकेत अर्थव्यवस्था के लिए अच्छे नहीं हैं, पर आर्थिक संकट की इस घड़ी में भी सरकार खुलकर कुछ बोलने को तैयार नहीं है। कल पी चिदंबरम ने कहा था कि ‘‘फिलहाल हमारा मानना है कि रुपये अपने वास्तविक स्तर से बहुत अधिक गिर गया है.. मुझे विश्वास है कि रुपया अपना वास्तविक स्तर प्राप्त कर लेगा।’’ लेकिन दूसरी ओर वाणिज्य मंत्री आनंद कुमार शर्मा ने मंगलवार को व्यापार बोर्ड की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह देखना बैंकिंग सचिव, बैंकरों तथा रिजर्व बैंक का काम है कि आप सोने को कैसे भुना सकते हैं। ऐसे देश में जहां 31,000 टन से अधिक घोषित सोना है। इसलिए अगर आज की कीमत में 500 टन सोने को भी भुनाया जाता है तो मेरे विचार से यह कैड के लिए काफी होगा।’’

शर्मा के इस बयान के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि देश के आर्थिक हालात एक बार 1991 की तरह बदहाली के दौर में पहुंच चुकी है। गौरतलब है कि खराब आर्थिक स्थिति के चलते सरकार को 1991 में सोना गिरवी रखने की नौबत आई थी, जिसके बाद सरकार ने उदारीकरण की नीति अपनाई थी। हालांकि पीएम ने कुछ दिन पहले कहा था कि अभी देश के हालात इतने खराब नहीं हुए हैं कि सोने  को गिरवी रखा जाए।


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