क्या ट्राई दूरसंचार उद्योग में वापस ला पाएंगा रौनक...

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Wednesday, September 11, 2013-9:04 PM

नई दिल्ली : भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) द्वारा प्रस्तावित नई स्पेक्ट्रम कीमत नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) के 1.76 लाख करोड़ रुपये के संभावित नुकसान की गणना करने के तरीके के लिए एक चुनौती है और इससे दूरसंचार उद्योग से 2008 के बाद से गायब खुशी उसे वापस मिल सकती है। यह बात विशेषकों ने कही।

ट्राई ने सोमवार को सीएजी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा, ‘‘कल्पना के आधार पर पेश अनुमानित नुकसान ने कुछ हद तक माहौल में निराशा पैदा किया, जिसके कारण फैसले लेने की प्रक्रिया अवरुद्ध हो गई।’’

दूरसंचार परामर्श कंपनी कॉम फस्र्ट के निदेशक महेश उप्पल ने आईएएनएस से कहा, ‘‘मेरे खयाल से उद्योग की छवि खराब करने के लिए कई कारक जैसे अधिकारियों, नेताओं और कारोबारियों की वास्तविक शरारत और सीएजी द्वारा प्रस्तुत काल्पनिक नुकसान के आंकड़े जिम्मेवार हैं। हम इस माहौल को रातों-रात नहीं बदल सकते हैं। लेकिन आधार मूल्य को लेकर ट्राई के रुख से तार्किक विशेषण और पारदर्शिता बढ़ेगी।’’

सर्वोच्च न्यायालय ने 2008 में लाइसेंस आवंटन के तरीके को दोषपूर्ण पाते हुए 122 दूरसंचार लाइसेंसों को खारिज कर दिया था। एचसीएल इंफोसिस्टम के रणनीति कार्यकारी उपाध्यक्ष रोथिन भट्टाचार्य ने आईएएनएस से कहा, ‘‘सीएजी की रिपोर्ट से निश्चित रूप से उद्योग को नुकसान पहुंचा है। सरकार के स्तर पर कई फैसले रुके हुए हैं। पिछले तीन सालों से सरकार के स्तर पर कोई गतिविधि नहीं हो पाई है।’’ ट्राई ने ताजा सुझाव में बोली लगाने वाले के लिए कंपनियों को आकर्षित करने के लिए स्पेक्ट्रम का आधार मूल्य काफी घटा दिया है। नवंबर 2012 और मार्च 2013 में हुई स्पेक्ट्रम नीलामी में ऊंचे मूल्य रखे जाने के कारण कोई खरीददार नहीं पहुंचा था।


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