इलेक्ट्रानिक उपकरणों से खेलना घातक हो सकता है बच्चों के लिए

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Sunday, September 15, 2013-6:03 PM

नई दिल्ली: महानगरों में पांच से बारह वर्ष तक की उम्र के 85 फीसदी बच्चों में लैपटाप, मोबाइल फोन और टैबलेट जैसे इलेक्ट्रानिक उपकरणों का दीवानापन लिए एकाकीपन (अवसाद) यादाश्त में कमी और अनिद्रा जैसे मानसिक रोगों की चपेट में आने का खतरा पैदा कर रहा है। उद्योग संगठन एसोचैम के ताजा सर्वेक्षण, हू इज किंडिंग, ए राइजिंग ट्रेंड के मुताबिक छोटे बच्चों में इलेक्ट्रानिक उपकरणों से खेलने की चाहत लगातार बढ रही है। इन उपकरणों के लगातार संपर्क में रहने से इनने ध्यान केन्द्रित करने, यादाश्त और निद्रा के पैटर्न में बेतरतीब बदलाव देखने को मिल रहा है जो आगे इनमें कयी तरह के घातक मानसिक रोग पैदा कर सकता है।

सर्वेक्षण के मुताबिक शहर के 63 फीसदी बच्चों के पास उनके घरों में कंप्यूटर है। इनमें से 60 प्रतिशत हर दूसरे दिन जबकि 27 फीसदी रोजाना इंटरनेट देखते हैं। हर दस में से एक बच्चे के पास मोबाइल फोन है।’ सोशल साइट के संपर्क में आने वाले बच्चों की संख्या पिछले तीन वर्षों में 25 फीसदी से बढकर 65 फीसदी हो चुकी है। सर्वेक्षण के मुताबिक इलेक्ट्रानिक उपकरणों से लगाव उन बच्चों में ज्यादा है जिनके माता पिता दोनों नौकरी करने वाले हैं। अभिभावकों की गैर मौजूदगी में यह उपकरण ही इनके साथी होते हैं।

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