चुनावों का रियल एस्टेट सैक्टर पर प्रभाव

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Saturday, October 12, 2013-1:48 PM

रियल एस्टेट सैक्टर संबंधी नीति निर्माण में सरकार की सुस्ती ही इस सैक्टर के लिए परेशानी का सबब थी, अब अगले साल देश भर में होने जा रहे आम चुनावों की घोषणा भी डिवैल्पर्स के लिए चिंता की वजह बन चुकी है। चुनावों ने पहले से ही रियल एस्टेट सैक्टर में छाई मंदी के दौर को आने वाले समय तक खींच दिया है।

चुनाव एवं रियल एस्टेट का हमेशा से गहरा संबंध रहा है जो इस सैक्टर में विकास की दर के लिए स्थिरता का माहौल ले आते हैं। यह ऐसा बिजनैस है जिसके लिए कई प्रकार की स्वीकृतियां तथा प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए प्रशासन के सम्पर्क में रहना पड़ता है। ऐसे में यदि नई सरकार में कोई बड़ा परिवर्तन आता है तो डिवैल्पर्स की योजनाओं को झटका लग सकता है। वैसे भी अगले साल होने वाले चुनाव कई कारणों से इस सैक्टर के लिए बड़ा महत्व रखते हैं।

यह सैक्टर उत्सुकता से नई केंद्र सरकार के गठन की प्रतीक्षा में है। कई नीतियां तथा विधेयक पैंडिंग हैं जिनमें रियल एस्टेट नियामक विधेयक तथा भूमि अधिग्रहण विधेयक शामिल हैं। रियल एस्टेट सैक्टर में चिंता का सबब बने इस सैक्टर को यह तथ्य भी पता है कि इन विधेयकों में सुधार के लिए प्रयास किए जाने का भी कोई खास लाभ नहीं होगा यदि चुनावों के बाद केंद्र में कोई अस्थिर सरकार आ जाती है।

ऐसे में लोकसभा चुनावों को देखते हुए रियल एस्टेट सैक्टर नीति निर्माण पर पाबंदी तथा राजनीतिक अनिश्चितता के बीच फंस गया है। लोकसभा चुनावों का इस सैक्टर पर कितना गहरा प्रभाव है इसका अनुमान इस तथ्य से ही लगाया जा सकता है कि बड़े आर्थिक कारकों के आधार पर अपना काम करने वाला भारतीय कार्पोरेट जगत इन दिनों नीतियों के स्थान पर अर्थव्यवस्था को लेकर चिंतित है।

वहीं रियल एस्टेट का माइक्रो मार्कीट बिजनैस है जो स्थानीय नीतियों एवं कानूनों पर अधिक निर्भर करता है। ऐसे में यह सैक्टर भी राजनीतिक बदलाव से उभरने वाली स्थितियों के बारे में सोच रहा है। वैसे अर्थव्यवस्था के लगातार नीचे की ओर जाने तथा केंद्र में संभावित गठबंधन यानी अस्थिर सरकार के आने की अटकलों के बीच विशेषज्ञों का मानना है कि इन बातों का अल्पकाल में तो रियल एस्टेट सैक्टर पर अधिक असर नहीं होगा।

एक विशेषज्ञ के अनुसार इस सैक्टर को अभी से चुनावों के बाद पैदा होने वाली स्थितियों को लेकर घबराना नहीं चाहिए क्योंकि इस वक्त पहले से ही बाजार में सुस्ती का माहौल बना हुआ है। बेशक एक स्थिर सरकार का मतलब नीति निर्माण में तेजी होता है लेकिन अभी से भविष्य को लेकर चिंतित होना जरूरी नहीं है।

अन्य विशेषज्ञ इस बारे में एकमत हैं कि यह कोई आम चुनावी वर्ष नहीं है जहां चुनावों के परिणामों का इंतजार किया जाएगा तथा देखा जाएगा कि वे उनके बिजनैस को किस तरह से प्रभावित कर सकते हैं या उनसे उन्हें किस तरह के लाभ हो सकते हैं। इस वक्त मतदाताओं के मन में अर्थव्यवस्था सबसे प्रमुख मुद्दा है। हाऊसिंग सैक्टर पहले ही अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है यदि यह विकास करता है तो अर्थव्यवस्था में भी सुधार होगा।


विदेशी निवेशकों की बात करें तो वे तब तक मार्कीट पर नजर रखने और इंतजार करने के मूड में हैं जब तक कि चुनाव के परिणाम न आ जाएं। जहां निवेश की इच्छा रखने वाले चुनावों तक इंतजार करना पसंद करें वहीं एक आम ग्राहक अपने निर्णयों पर चुनावों का ज्यादा असर नहीं होने देते और उन्हें चुनावों की अधिक चिंता नहीं होती है। बेशक बड़े डिवैल्पर्स कोई भी बड़ी परियोजना चुनावों से ठीक पहले लांच करना पसंद नहीं करते क्योंकि इसका संबंध नई नीतियों से हो सकता है। चुनावों के बाद होने वाले नीतिगत बदलावों से उनकी परियोजनाओं पर गलत असर भी हो सकता है।

अर्थशास्त्रियों का मत है कि सरकार एक कठिन दौर से गुजर रही है और वह हाऊसिंग मार्कीट में तेजी लाने के लिए जो बन सकता है, करने की कोशिश कर रही है ताकि चुनावों से पहले उसकी छवि सुधर सके परन्तु यह भी एक तथ्य है कि इस समय कठिन निर्णय लेने से वह भी घबरा रही है क्योंकि अल्पकाल में ऐसे फैसलों का इस सैक्टर पर खराब असर भी हो सकता है।

जानकारों का मानना है कि आम चुनावों के नतीजों का रियल एस्टेट सैक्टर के विकास पर बेशक कुछ न कुछ असर तो होगा ही परंतु यह चुनावों के बाद ही पता लगेगा कि मार्कीट तेजी पकड़ता है या वर्तमान गति से विकास करता है या इसमें और मंदी छा जाती है।

राजनीतिक स्थिरता और प्रगति की ओर ले जाने वाले सुधार जो आम चुनावों से ठीक पहले  सामने आ सकते हैं रियल एस्टेट मार्कीट को लाभ भी पहुंचाएंगे। कई सारे रियल एस्टेट सैक्टर से संबंधित महत्वपूर्ण फैसले पूर्ण स्वीकृति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सरकार को पता है कि ये फैसले इस क्षेत्र के विकास के लिए जरूरी हैं और इनका संबंध देश के समग्र आर्थिक विकास से भी है। इन फैसलों में देरी इस वजह से हो सकती है कि इनके अन्य सभी उद्योगों पर हो सकने वाले असर पर भी गौर करना होगा।
 
गौरतलब है कि नई सरकार की नीतियां तथा संसद में पैंडिंग पड़े विधेयकों के संबंध में लिए जाने वाले फैसले रियल एस्टेट सैक्टर के भविष्य में विकास पर गहरा असर डालेंगे। आने वाली सरकार कोई भी हो या कैसी भी हो, उसे देश की अर्थव्यवस्था में सुधार लाने के लिए रियल एस्टेट समेत सभी मुद्दों पर समझदारी से प्रगतिशील फैसले लेने होंगे।
 


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