किराए की फर्जी रसीद से नहीं बचा सकेंगे टैक्स

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Tuesday, October 22, 2013-2:25 PM

एचआरए एग्जेम्पशन क्लेम के जरिए अब इनकम टैक्स बचाना पहले की तरह आसान नहीं होगा। सरकार किराए की फर्जी रसीद के जरिए होने वाली टैक्स चोरी रोकना चाहती है। अभी तक 15 हजार रुपए महीना से ज्यादा किराए पर ही मकान मालिक का पैन नंबर देना अनिवार्य था, लेकिन अब इसकी सीमा घटा दी गई है।

हालांकि यह नियम सालाना एक लाख रुपए से कम किराया देने वाले आयकरदाता पर लागू नहीं होगा। आपको बता दें कि अब तक प्रति माह 15,000 रुपए से कम किराया देने पर मकान मालिक के पैन की जरूरत नहीं पड़ती थी पर नए नियम लागू होने के साथ यह छूट घटकर 8,333 रुपए प्रति माह पर आ गई है। इस साल आयकर विभाग ने रिटर्न से जुड़े कई बदलाव किए हैं। हालिया बदलाव हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) से जुड़ा है।

पिछले 10 अक्टूबर को केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड की ओर से जारी सर्कुलर के अनुसार, अगर कोई कर्मचारी सालाना एक लाख रुपए से अधिक किराया देता है तो उसे मकान मालिक के पैन नंबर की जानकारी देनी होगी। अगर मकान मालिक के पास पैन कार्ड नहीं है तो उसके नाम, पते के साथ कर्मचारी को एक घोषणा-पत्र देना होगा, लेकिन जिन कर्मचारियों को 3 हजार रुपए से कम एचआरए मिलता है, उन्हें टीडीएस के लिए किराए की रसीद देने की जरूरत नहीं है।
 

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