बैंकों के एनपीए में बढोतरी स्वीकार्य नहीं: चिदंबरम

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Tuesday, October 22, 2013-4:51 PM

नई दिल्ली: वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने आज कहा कि सरकारी बैंकों की गैर निष्पादित संपत्तियों (एनपीए) में बढोतरी स्वीकार नहीं है और अर्थव्यवस्था में तेजी आने पर एनपीए में स्वत: कमी आयेगी। चिदंबरम ने सरकारी बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के प्रमुखो के साथ बैठक के बाद यहां संवाददाताओ से कहा कि वर्ष 2000 में सरकारी बैंकों का सकल एनपीए 14 प्रतिशत के रिकार्ड स्तर पर था जो वर्ष 2008-09 में सबसे निचले स्तर पर आ गया।

इसके बाद दो वर्षों तक इसमें लगभग स्थिरता बनी रही लेकिन अब इसमें फिर से तेजी आने लगी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बैंकों से 30 ऐसे बडे डिफ्ल्टारों की सूची बनाकर उससे वसूली करने के उपाय करने के लिए कहा गया है जिससे उनके एनपीए में सबसे अधिक बढोतरी हुयी है।

वित्त मंत्री ने कहा कि भारतीय स्टेट बैंक में डिफ्ल्टारो से वसूली के लिए अलग से महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी से कार्रवाई करने की व्यवस्था करने के लिए कहा गया है। तीस बडे डिफाल्टरों से वसूली होने और अर्थव्यवस्था में तेजी आने पर एनपीए में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि डिफाल्टरों के कार्यालयों को राजसात करना आसान काम नहीं है और यह सरल भी नहीं है।

उन्होंने कहा कि एक बार बंद कर दिये खाते में से जब तक एक रुपए तक बकाया की वसूली नहीं हो जाती है तब तक खाता बंद नहीं होता है और बैंको को एक रुपया तक की वसूली करने के लिए कहा गया है।


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