दीवाली से पहले आरबीआई का झटका, रेपो रेट में बढ़ोतरी

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Tuesday, October 29, 2013-12:13 PM

मुंबई: उद्योग जगत के साथ ही मकान और वाहन खरीदने के लिए सस्ते ऋण की उम्मीद लगाने वालों को आज उस समय एक और झटका लगा जब भारतीय रिजर्व बैंक ने महंगाई को नियंत्रित करने के अपने अभियान को और कठोर बनाते हुये अल्पकालिक ऋण दरों, रेपो और रिवर्स रेपो में एक चौथाई प्रतिशत की बढोतरी कर दी है।

इसके साथ ही रिजर्व बैंक ने रुपए को मजबूती प्रदान करने के लिए किए गए मौद्रिक उपायों को भी वापस ले लिया है और चालू वित्त वर्ष में विकास के पूर्वानुमान को कम कर पांच प्रतिशत कर दिया है। केन्द्रीय बैंक ने कहा है कि चालू वित्त वर्ष में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति की दर ऊंची बनी रहेगी। रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने आज यहां चालू वित्त वर्ष की ऋण एवं मौद्रिक नीति की दूसरी तिमाही समीक्षा जारी करते हुये कहा कि रेपो दर 7.50 प्रतिशत से बढाकर 7.75 प्रतिशत और रिवर्स रेपो दर 6.50 प्रतिशत से बढाकर 6.75 प्रतिशत कर दी गयी है।

इसी तरह से रुपए को मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से किए गए मौद्रिक उपायों को वापस ले लिया गया है और मार्जिनल स्टैडिंग फैसिलिटी (एमएसएफ) को 0.25 प्रतिशत कम कर 8.75 प्रतिशत कर दिया गया है। अब रेपो दर और एमएसएफ के बीच एक प्रतिशत का अंतर रह गया है। रिजर्व बैंक ने इसी तरह से बैंक दर को भी 0.25 प्रतिशत कम कर 8.75 प्रतिशत कर दिया है। हालांकि नकद आरिक्षत अनुपात (सीआरआर) में कोई बदलाव नहीं किया गया है और यह चार प्रतिशत पर यथावत है।

वैधानिक तरलता अनुपात (एसएलआर) भी 23 प्रतिशत पर ही है। केन्द्रीय बैंक ने सात और 14 दिनों के लिए सावधि रेपो के तहत दी जाने वाली तरलता की सीमा को 0.25 प्रतिशत से बढाकर 0.50 प्रतिशत कर दी है। राजन ने कहा है कि ब्याज दरों में तालमेल बढाने के लिए रेपो दर में बढोतरी और एमएसएफ में कटौती की गयी है। रिजर्व बैंक ने कहा है कि वह मुद्रास्फीति के साथ ही विकास से जुडी गतिविधियों पर भी नजर रखे हुये हैं। उसने कहा है कि कीमतों में हो रही बढोतरी पर लगाम लगाना जरूरी है क्योंकि इससे बचत प्रभावित हो रही है।

केन्द्रीय बैंक ने कहा कि महंगाई के दबाव को कम करने और मुद्रास्फीति में बढोतरी को नियंत्रित करने से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और विकास में तेजी आयेगी। रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के विकास अनुमान को 5.5 प्रतिशत से कम कर पांच प्रतिशत कर दिया है।


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