आदेश में संशोधन के लिए सहारा समूह पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

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Tuesday, October 29, 2013-2:48 PM

नई दिल्ली: सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत राय सहारा के बाहर जाने से रोक संबंधी आदेश में संशोधन का उच्चतम न्यायालय से अनुरोध किया गया है। सहारा समूह की ओर से विरष्ठ अधिवक्ता सी.ए.सुन्दरम ने न्यायमूर्ति ए एस राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति ए के सिकरी की खंडपीठ के समक्ष दलील दी कि अदालत की अवमानना मामले में कल सुनवाई के दौरान जो आदेश दिया गया था।

वह न्यायालय की वेबसाइट पर बाद में लोड किये गए आदेश से भिन्न था। सुन्दरम ने कहा कि न्यायालय ने कल अपने आदेश में कहा था कि सहारा समूह 20 हजार करोड रुपए की सम्पत्ति के मालिकाना हक से संबंधित मूल दस्तावेज भारती प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी) को तीन सप्ताह के भीतर सौंपे। न्यायालय ने कहा था कि सहारा समूह इस निर्धारित अवधि के भीतर यदि दस्तावेज जमा कराने में असमर्थ रहता है तो उसके बाद समूह के प्रमुख सुब्रत राय और तीन अन्य प्रोमोटर उसकी अनुमति के बगैर देश नहीं छोडेंगे।

अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि उसकी वेबसाइट पर बाद में लोड किये गए आदेश बिल्कुल उलट हैं, जिसमें लिखा गया है कि सहारा समूह द्वारा दस्तावेज जमा किये जाने तक ये लोग देश नहीं छोड सकते। उन्होंने मौखिक और लिखित आदेश में इस अंतर का विशेष उल्लेख किया। सहारा समूह ने अपने लिखित आदेश में संशोधन करने का आग्रह न्यायालय से किया है।

कल का आदेश सुनाने वाली खंडपीठ में न्यायमूर्ति राधाकृष्णन के अलावा न्यायमूर्ति जे एस केहर शामिल थे, लेकिन आज की खंडपीठ में न्यायमूर्ति केहर के बजाय न्यायमूर्ति सिकरी बैठे थे। सुन्दरम की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति सिकरी ने कहा कि न्यायालय कल की खंडपीठ में शामिल न्यायमूर्ति केहर से इस बारे में संपर्क करेगा। न्यायालय ने कल कहा था कि सहारा समूह निवेशकों से जमा पैसों को वापस करने के मामले में आंखमिचौली खेल रहा है और अब उस पर इस मामले में अधिक विश्वास नहीं किया जा सकता।

उल्लेखनीय है कि न्यायालय ने निवेशकों से जमा 24 हजार करोड रुपए लौटाने का सहारा समूह को आदेश दिया था, लेकिन उसने इस पर अमल नहीं किया। जिसके बाद सेबी ने अदालत की अवमानना का मामला दर्ज किया है। जिसकी सुनवाई के दौरान ही कल न्यायालय ने
उक्त आदेश सुनाया था।


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