युवा पीढ़ी को लुभाने के लिए डाकखानों का आधुनिकीकरण

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Thursday, November 07, 2013-11:05 AM

हाल ही में हैदराबाद में खुले एक नई पीढ़ी के पोस्ट आफिस में प्रवेश करके टी.सी.एस. में कार्यरत 24 वर्षीय येल्लाप्रागादा राजशेखर की प्रतिक्रिया थी कि यह लगभग एक निजी बैंक की भव्य ब्रांच जैसा दिखाई देता है। यह अब कोई एक दुर्लभ मामला नहीं रह गया है। बैंकों के बाद अब वर्षों पुराने पोस्ट आफिस एक आधुनिक छटा के साथ युवा पीढ़ी को लुभाने की ओर अग्रसर हैं।

सारे देश में बहुत से डाकखाने, जिन पर दशकों से रंग-रोगन भी नहीं किया गया था, का अब कायाकल्प किया जा रहा है। राजधानी दिल्ली स्थित इंडिया पोस्ट मुख्यालय में नियुक्त एक शीर्ष कार्याधिकारी ने बताया कि अभी तक 2515 डाकखानों का नवीनीकरण किया गया है जिन पर 314 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। इनके सौन्दर्यीकरण का उद्देश्य इन्हें युवा पीढ़ी से जोडऩा है। इन उन्नत डाकखानों में आपको ग्राहकों तथा कर्मचारियों के लिए अधिक स्थान, सिंगल-विंडो काऊंटर्स तथा कार्यालय के पीछे डाक छांटने के आधुनिक काऊंटरों जैसी कुछ विशेषताएं दिखाई देंगी।

डाक विभाग ने अन्य 2500 डाकखानों के कायाकल्प की योजना तैयार की है जिनमें से 20 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में होंगे। इसके लिए विभाग को पहले ही 210 करोड़ रुपयों की मंजूरी मिल गई है। पहले 'प्रोजैक्ट ऐरो' के नाम से शुरू की गई आधुनिकीकरण की यह योजना अब विभिन्न राज्यों में गति पकड़ रही है। इन डाकखानों की न केवल छटा बल्कि काम करने की प्रक्रिया का भी आधुनिकीकरण किया जा रहा है। बैंकों में कोर बैंकिंग सोल्यूशन्स की ही तरह 18,600 डाकखानों को एक केन्द्रीय सर्वर के अन्तर्गत लाया जा रहा है।

अधिकारी ने बताया कि ए.टी.एम. के अतिरिक्त वे शीघ्र ही स्पीड पोस्ट तथा पार्सलों की ऑनलाइन बुकिंग शुरू करने जा रहे हैं। डाकखानों के आधुनिकीकरण के लिए 4800 करोड़ रुपए रखे गए हैं। उसने बताया कि हाल ही में विभाग द्वारा करवाए गए एक बाहरी ऑडिट से पता चला है कि आधुनिकीकरण के बाद 98 प्रतिशत ग्राहक संतुष्ट हैं। वरिष्ठ नागरिक भी खुश हैं। एक सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी वी. वेंकटाचारी ने बताया कि वह एक ही डाकखाने में गत 30 वर्षों से जा रहे हैं और उन्होंने पोस्टमास्टर को निर्बाध रूप से केवल पासबुकों को अपडेट करते तथा मोहरें लगाते ही देखा है।

यह कायाकल्प काफी समय पहले ही हो जाना चाहिए था। डाकखानों के विशाल नैटवर्क को देखते हुए यह कार्य काफी मुश्किल दिखाई देता है। अंग्रेजों द्वारा शुरू देश में 1,54,822 डाकखाने हैं, जो विश्व में सबसे बड़ा नैटवर्क है। अब यह देखना बाकी है कि सभी पोस्ट आफिसिज में यह कायाकल्प कैसे किया जाता है?    

                                                                                                                                                              ( ' हिन्दू ' से साभार )            


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