अगले साल काबू में रहेगी खाद्य महंगाई!

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Sunday, December 22, 2013-6:04 AM

जालंधर: महंगाई की मार से जूझ रही सरकार और आम आदमी के लिए खेतों से अच्छे संकेत सामने आ रहे हैं। रबी सीजन के दौरान देश में बुआई का रकबा 29 लाख हैक्टेयर बढ़ा है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक रबी सीजन में अब तक 8536.37 लाख हैक्टेयर रकबे में बुवाई हुई है जबकि पिछले साल समान अवधि में 507.26 लाख हैक्टेयर रकबे में बुवाई हुई थी।

सबसे बड़ी राहत दलहन की बुवाई के मोर्चे पर है। दलहन की बुवाई का रकबा इस साल 126.84 लाख हैक्टेयर को पार कर गया है जबकि पिछले साल समान अवधि में 121.22 लाख हैक्टेयर में दलहन की बिजाई हुई थी। दलहन की अधिकतर बिजाई के चलते आने वाले साल में दालों के दाम बढऩे की संभावना कम हो गई है। खेती के सुधार के संकेत पिछले 8 माह के यूरिया आयात से ही मिलने शुरू हो गए थे। पिछले 8 माह में 5.75 मिलियन टन यूरिया का आयात किया है जबकि पिछले साल समान अवधि में यह 5.41 मिलियन टन था।

इस साल की दूसरी तिमाही में आए विकास दर के आंकड़ों में भी खेती की बेहतर होती तस्वीर का पता लग रहा है। दूसरी तिमाही में कृषि की विकास दर 4.6 प्रतिशत रही है और कृषि दर में वृद्धि के सहारे ही विकास दर 4.8 प्रतिशत तक पहुंची है। देश में बढ़ रहा फसलों का रकबा सरकार के लिए महंगाई के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा कानून के लिहाज से भी अहमियत रखता है। सरकार को देश भर में खाद्य सुरक्षा कानून लागू करने के लिए बफर स्टाक कायम रखने की जरूरत है और खाद्यान्न का बढऩे वाला उत्पादन इसमें सहायक होगा।

2011-12 में देश में 257.44 मिलियन टन खाद्यान्न का उत्पादन हुआ था जिसमें से 93.90 मिलियन टन हिस्सा गेहूं का था जबकि 104.32 मिलियन टन चावल की पैदावार हुई थी। इस बीच सरकार को उम्मीद है कि चालू साल में खरीफ सीजन में ही भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा खाद्यान्न उत्पादक बन सकता है और इस साल भारत में खरीफ सीजन के दौरान खाद्यान्न का उत्पादन 129.32 मिलियन टन तक पहुंच सकता है।


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