सब्सिडी बोझ के कारण तेल खनन गतिविधियां प्रभावित: विवेक राय

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Thursday, January 09, 2014-3:06 PM

नई दिल्ली: तेल एंव प्राकृतिग गैस आयोग ओएनजीसी और आयल इंडिया जैसी सरकारी तेल कपंनियां सब्सिडी के बढते बोझ के कारण खोज और खनन कार्यो में ज्यादा निवेश करने में असमर्थ हैं। पेट्रोलियम सचिव विवेक राय ने आज यहां संवाददाताओ से कहा कि तेल और प्राकृतिग गैस के कई ऐसे क्षेत्र है जहां यह कंपनियां बडी मात्रा में कच्चे तेल का खनन कर सकती हैें लेकिन इसके लिए खनन गतिविधियों पर काफी खर्च करना पडेगा।

सब्सिडी का बोझ बढने से इनके लिए इस काम में बडी पूंजी लगाना मुश्किल हो रहा है। राय ने कहा कि बाम्बे हाई और कृष्णा गोदावरी बेसिन ऐसे क्षेत्र है जहां खनन गतिविधियां बढाने की प्रचुर संभावनाएं है। यहां कम से कम 7 करोड टन कच्चे तेल के भंडार मौजूद है। अभी यह कंपनियां खनन गतिविधियों पर 40 से 42 डालर प्रति बैरल ही खर्च कर पाती है जबकि इनके ज्यादा दोहन के लिए कम से 65 डालर प्रति बैरल खर्च किया जाना चाहिए। सब्सिडी का बोझ ज्यादा होने से इतना पैसा खर्च करना इन कंपनियों के बस में नहीं है।

पेट्रोलियम सचिव ने कहा कि कच्चा तेल 105 डालर प्रति बैरल की दर से आयात करने से बेहतर है कि घरेलू स्तर पर इसके खनन के लिए 65 डालर प्रति बैरल खर्च किया जाए। ऐसे में तेल कपंनियों के सब्सिडी बोझ की समीक्षा जरूरी है। ओएनजीसी और आयल इंडिया जैसी कंपनियां आईओसी, एचपीसीएल और बीपीसीएल जैसी सरकारी तेल विपणन कंपनियों को डीजल, मिट्टी का तेल और घरेलू रसोर्ई गैस को बाजार मूल्य से कम कीमत पर बेचने के लिए काफी सब्सिडी देती हैं।


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