‘जब बिड़ला के कारोबार विस्तार में आड़े आया बटर चिकन’

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Monday, January 20, 2014-9:39 AM

नई दिल्ली: उद्योगों के अंतर्राष्ट्रीय विस्तार में कई बार छोटी छोटी चीजें भी खतरा बन जाती हैं और उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला के लिए यह खतरा उनकी कंपनी के दफतर की कैंटीन में ‘बटर चिकन’ पकाने के रूप में सामने आया। उल्लेखनीय है कि आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम मारवाड़ी समुदाय से हैं जहां शाकाहार जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा और विश्वास है। यहां तक कि कंपनी के किसी भी कार्यालय या कारखाने की कैंटीन में मांस नहीं पकाया या परोसा जाता, यहां तक कि कंपनी के कार्यक्रमों में शराब भी नहीं परोसी जाती।

कंपनी द्वारा ऑस्ट्रेलिया में एक कारोबार के अधिग्रहण तक यह सब ठीक था। ऑस्ट्रेलिया जहां अधिकांश कर्मचारियों के लिए बीयर तथा भूना मांस (बार्बेक्यू) दैनिक जीवन का हिस्सा है। बिड़ला के अनुसार, ‘अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करना कठिन, जोखिम भरा काम है। मुझे याद है कि जब मैंने किसी बिड़ला कैंटीन में बटर चिकन परोसा जाते देखा तो पाया कि कई बार सबसे बड़ी चुनौती वह बन जाती है जिससे आपको ज्यादा उम्मीद नहीं होती।’


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