खुदरा व्यापार में FDI पर पाबंदी का ‘आप’ सरकार का फैसला सही : गोविंदाचार्य

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Wednesday, January 22, 2014-4:08 PM

नई दिल्ली: दिल्ली में ख्खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पर पाबंदी लगाने के लिए आम आदमी पार्टी सरकार की सराहना करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के. एन. गोविंदाचार्य ने आज कहा कि स्वदेशी आंदोलन सहित अनेक संगठन इसकी काफी समय से मांग कर रहे थे।

गोविंदाचार्य ने कहा, ‘‘आम आदमी पार्टी की सरकार ने दिल्ली में खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पर पाबंदी लगाई है। देश में स्वदेशी आंदोलन से जुड़े अनेक संगठन और व्यक्ति इसकी काफी समय से मांग उठा रहे थे। यह अच्छा कदम है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘राजनीति को मूल्यों एवं मुद्दों की पटरी पर वापस लाने के प्रयास में उभरी आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल के लिए यह संयम का समय है।’’

दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिये जाने का पक्ष लेते हुए गोविंदाचार्य ने कहा कि दिल्ली और केंद्र सरकार के बीच हाल का टकराव पूर्ण राज्य के विषय से संबंधित है, जो महत्वपूर्ण ,जटिल और संवेदनशील मुद्दा है। इस पर केंद्र को क्षुद्र राजनीति नहीं करनी चाहिए और केजरीवाल को सामान्य जन के प्रति जिम्मेदारी जाहिर करके यह देखना चाहिए कि वे कांग्रेस की राजनीति का शिकार न हों। भाजपा के पूर्व नेता ने कहा कि आजादी के बाद भारतीय राजनीति में सत्ताबल, बाहुबल और धनबल का प्रभाव बेतहाशा बढा है। राजनीति जनता से कटकर सत्ता से जुड़ती गई। दल गिरोह की शक्ल में तब्दील होने लगे। सभी दल एक से लगने लगे। लेकिन पिछले कुछ वर्षो में आत्मबल और जनबल के सहारे जनांदोलन उभरे हैं।

अन्ना हजारे, योगगुरू रामदेव एवं कुछ और लोगों ने सूचना का अधिकार, विदेश में जमा कालाधन, जनलोकपाल, नोटा और चुनाव सुधार के मुद्दे उठाये।’’ जम्मू कश्मीर के विषय पर गोविंदाचार्य ने कहा कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। यह विषय संवेदनशील है। ऐसे में सभ्भी लोगों की जिम्मेदारी है कि अपनी सोच, वाणी और बोल में इस बात का ध्यान रखें कि यह राजनीति का विषय नहीं बने। उन्होंने कहा कि अगर ध्यान नहीं दिया जाए तब कुछ का कुछ अर्थ निकलेगा और उससे दुश्मनों को मदद मिल सकती है।

जम्मू कश्मीर के संदर्भ में अनुच्छेद 370 और पाक अधिकृत कश्मीर का विषय है। इन विषयों पर संयम और सावधानी की जरूरत है। भाजपा के पूर्व नेता ने कहा कि जहां तक प्रशांत भूषण के बयान का सवाल है, उन्होंने जनमत संग्रह के आग्रह का अतिरेक किया है। जम्मू कश्मीर के किसी भी पहलू के बारे में, चाहे वह सेना को रखने या हटाने पर जनमत संग्रह की बात हो, यह विषय को उलझाने सरीखा है, जिसका पाकिस्तान और अन्य ताकतें दुरूपयोग कर सकती हैं।

 


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