जलवायु में बदलाव को झेलने क्षमता वाले चने के जर्मप्लाज्म की हुई पहचान

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Saturday, January 25, 2014-3:23 PM

हैदराबाद: वैज्ञानिकों को यहां स्थित फसल अनुसंधान संस्थान में चने की करीब 40 जर्मप्लाज्म श्रृंखला का पता चला है जो सूखे, उच्च तापमान और क्षारीयता जैसे कठोर मौसमी असर को झेलने की सक्षम है। अर्धशुष्क उष्णकटिबंधी क्षेत्र के लिए अंतर्राष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थन (इक्रिसैट) ने यहां जारी एक बयान में कहा कि जलवायु प्रतिरोधक जर्मप्लाज्म श्रृंखला से एशिया और अफ्रीका के उपसहारा क्षेत्र में छोटे किसानों बदलती जलवायु के असर से निपटने की दिशा में की जा रही कोशिश को मदद मिलेगी।

विविधीकृत चने में करीब 40 ऐसी जर्मप्लाज्म श्रृंखलाएं मिली हैं जो जिनमें उपज और सूखे को झेलने की क्षमता है। चना पूरे विश्व के लिए महत्पूर्ण फली है और वैश्विक स्तर पर 1.32 हेक्टेयर के दायरे में भूमि पर 1.16 करोड़ टन का उत्पादन होता है। भारत का वैश्विक उत्पादन 70.7 प्रतिशत योगदान है और ऑस्ट्रेलिया, तुर्की, म्यांमा, इथोपिया, ईरान और पाकिस्तान में भी इसका उत्पादन होता है।

प्रोटीन, स्टार्च, रेशा, खनिज और विटामिन से भरपूर चना मानव के लिए सबसे पौष्टिक संतुलित दलहन है। भारतीय उपमहाद्वीप में इसकी खेती जमीन की आर्द्रता कम होने पर अक्तूबर नवंबर से मार्च अप्रैल के दौरान होती है और यह करोड़ों लोगों का पेट भर सकता है।


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