महंगाई पर काबू किए बगैर विकास संभव नहीं: राजन

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Tuesday, January 28, 2014-3:32 PM

मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने एक बार फिर महंगाई पर लगाम लगाने को अपनी प्राथमिकता बताते हुए कहा है कि इसके बगैर विकास संभव नहीं है। आरबीआई के गवर्नर रघुराम राजन ने आज चालू वित्त वर्ष की ऋण एवं मौद्रिक नीति की तीसरी तिमाही समीक्षा जारी करने के बाद यहां संवाददाताओं से कहा कि आॢथक विकास के लिए महंगाई को नियंत्रित करना बहुत जरूरी है। इसलिए इस बार रेपो और रिवर्स रपो दरों में एक चौथाई प्रतिशत की बढोतरी करने का फैसला लिया गया है।

उन्होंने कहा कि आरबीआई ऋण दरों को लेकर न तो बहुत सख्त है और न ही बहुत नरम है बल्कि उसका काम चौकसी करने का है। महंगाई पर नजर रखना उसकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय जब अन्य लोग आराम फर्मा रहे हैं आरबीआई पूरी तरह चौकस है। उसकी नजर हर समय महंगाई पर लगी रहती है। हालांकि फिलहाल महंगाई थोडी नरम पडी है लेकिन आम आदमी के लिए इसका स्तर अभी भी असहज बना हुआ है। ऐसे में मांग और महंगाई के समीकरण की दोबारा समीक्षा जरूरी है।

राजन ने कहा कि दिसंबर में सब्जियों और फलों के दाम में काफी कमी आई लेकिन महंगाई में उतनी कमी नहीं रही जितनी होनी चाहिए थी ऐसे में बीमार अर्थव्यवस्था को दवा की जरूरत थी इसलिए नीतिगत दरों को बढाकर इसका उपचार करने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि आगे संभवत: ऐसा करने की जरूरत नहीं पडेगी लेकिन फिर भी हालात पर नजर रखना जरूरी है इस पर से नजर हटाना जोखिम भरा हो सकता है।

खुदरा और थोक महंगाई दर में नरमी के बावजूद आरबीआई ने इस बार रेपो और रिवर्स रेपो दरों में बढोतरी कर बाजार और उद्योग जगत को हैरत में डाल दिया है। उद्योग संगठनों ने कहा है कि वह इससे सदमें में हैं। ऐसे समय जबकि अर्थव्यवस्था पहले से ही गहरे दबाव में और औद्योगिक उत्पादन घट रहा है आरबीआई के इस कदम से विकास की रफ्तार और धीमी पड सकती है।


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