‘टैक्स हेवेन’ वर्जिन आइलैंड ने एफडीआई में भारत-ब्राजील को पछाड़ा

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Wednesday, January 29, 2014-2:41 PM

जेनेवा: संयुक्त राष्ट्र (यूएन) का कहना है कि टैक्स हेवेन के नाम से जाने जाने वाले करों में भारी छूट देने वाले देश ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में पिछले साल भारत और ब्राजील जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले कहीं ज्यादा विदेशी निवेश हुआ। यूनाइटेड नेशन्स कान्फ्रेंस आन ट्रेड एंड डेवलपमेंट (अंकटाड) द्वारा कल यहां जारी आंकड़ों में कहा गया है कि वर्ष 2013 में भारत और ब्राजील में संयुक्त रूप से जितना विदेशी निवेश हुआ उससे कहीं ज्यादा निवेश अकेले ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में हुआ।

आरंभिक आंकडों के अनुसार पिछले साल 92 अरब डॉलर के विदेशी निवेश के साथ यह दुनिया में चौथे स्थान पर रहा। रिपोर्ट के मुताबिक विदेशी निवेश के मामले में 159 अरब डॉलर के साथ अमेरिका पहले और 127 अरब डॉलर के साथ चीन दूसरे स्थान पर रहा। तीसरे स्थान पर ब्रिटेन रहा जहां निवेश ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड के मुकाबले महज दो अरब डॉलर ज्यादा रहा। अंकटाड ने कहा कि वर्जिन आइलैंड में विदेशी निवेश 2012 के मुकाबले 40 प्रतिशत अधिक रहा।

आने वाले सालों में इसका इस तेजी से बढऩा संभव नहीं दिखता। यहां जिस तेजी से पैसा लगाया गया उसी तेजी से निकाला भी गया है। जिन देशों में कर की दरें काफी ज्यादा हैं वहां की कंपनियां कर बचाने के लिए इस कैरेबियाई देश का इस्तेमाल करती हैं। लेकिन जी20 समेत दूसरे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और अन्य देशों के बढ़ते दबाव के बीच हो सकता है वर्जिन आइलैंड अपने नियम कड़े करने पर विवश हो जाए जिससे यहां विदेशी निवेश कम हो जाएगा।


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