भारत में उद्योगों की पूंजी लागत ऊंची: सर्वेक्षण

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Monday, February 17, 2014-12:24 PM

नई दिल्ली: एक सर्वेक्षण के अनुसार ऊंची ब्याज दरों के चलते भारत में उद्योग ऊंची पूंजी लागत की समस्या से जूझ रहे हैं, जबकि विकसित देशों में स्थिति ऐसी नहीं है।

वैश्विक सलाहकार कंपनी ईवाई के अनुसार अलग अलग क्षेत्रों में पूंजी की लागत अलग अलग है। भू-संपत्ति और दूरसंचार क्षेत्र इस समय सबसे ऊंची लागत से जूझ रहे हैं जबकि क्रीम, पाउडर जैसे त्वरित उपभोग का सामान बनाने वाली एफएमसीजी और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और आईटी से जुड़ी सेवाओं के क्षेत्र की कंपनियां लागत के दायरे में सबसे नीचे हैं।

सर्वेक्षण के अनुसार करीब आधे उद्यमों ने कहा है कि पिछले तीन से चार साल के दौरान पूंजी की लागत बढ़ी है। ‘‘भारत में पूंजी की लागत विकसित देशों के मुकाबले काफी ऊंची है .... विकसित देशों की पूंजी लागत से तुलना करने पर भारत में निवेश  पर पूंजी लागत में औसतन 3.6 प्रतिशत का अंतर है।’’

किसी कंपनी की पूंजी लागत में आमतौर पर दो तरह के घटक होते हैं। रिण और इक्विटी लागत तथा रिण और इक्विटी कोष का कंपनी के पूंजीगत ढांचे में अनुपात।

सर्वेक्षण के अनुसार ‘‘.... पिछले कुछ सालों से भारत में पूंजी की लागत धीरे धीरे बढ़ी है। इसकी कई वजह हैं, सबसे प्रमुख मुद्रास्फीति की उल्लेखनीय वृद्धि और अर्थव्यवस्था में व्याप्त कथित जोखिम।’’

ईवाई सलाहकार सेवा के पार्टनर नवीन वोहरा ने कहा इसमें आश्चर्य वाली कोई बात नहीं हैं कि भारत में पूंजी लागत ऊंची है। भारत में ब्याज दरें काफी ऊंची और पिछले कुछ सालों से मुद्रास्फीति भी ऊंची रही है, लेकिन विकसित देशों में ऐसा नहीं है, इन देशों में मौद्रिक प्रोत्साहन के जरिये जोखिम रहित दरों को अपनाया गया।


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