भारत अपने 83 द्विपक्षीय निवेश समझौते की समीक्षा कर रहा है: शर्मा

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Sunday, February 23, 2014-1:07 PM

नई दिल्ली: सरकार ने आज कहा कि वह अपने सभी द्विपक्षीय निवेश संवद्र्धन और संरक्षण समझौतों की समीक्षा कर रहा है। यह पहल वैश्विक कंपनियों की देश की निवेश नीतियों से जुड़ी चिंताओं के बीच की गई है। अब तक भारत ने विभिन्न देशों में 83 द्विपक्षीय निवेश संवद्र्धन एवं संरक्षण समझौते (बिप्पा) किए हैं। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने एक समारोह में कहा ‘‘हम 83 ऐसे समझौते की समीक्षा कर रहे हैं क्योंकि जब कुछ विदेशी निवेशकों ने समझौते के प्रावधानों पर अमल किया तो इससे कुछ सबक मिले, कई मामलों में घरेलू क्षेत्राधिकार का सवाल भी उठा है। यह विवादास्पद है इसीलिए इसके कारण अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता के मामले बढ़ गए।’’

टेलीनॉर, सिस्तेमा और एतिसलात जैसी प्रमुख विदेशी दूरसंचार कंपनियों द्वारा ऐसे समझौतों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि ये कंपनियां आरबीआई और एफआईपीबी जैसी सरकारी एजेंसियों द्वारा पूरी जांच के बाद ही आईं हैं। उच्चतम न्यायालय द्वारा 2012 में दूरसंचार लाइसेंस रद्द किए जाने के बाद नॉर्वे की कंपनी टेलीनॉर, संयुक्त अरब अमीरात की एतिसलात और रूस की सिस्तेमा ने भारत के साथ द्वपक्षीय निवेश समझौते का हवाला देते हुए अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता का विकल्प चुना।

उन्होंने कहा ‘‘हमारी उन देशों के साथ द्विपक्षीय संधि है और हमारी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति, भारतीय रिजर्व बैंक, एफआईपीबी की उचित जांच और मंजूरी के अलावा आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की मंजूरी के जरिए ये निवेश आए।’’ उन्होंने कहा ‘‘निवेश आ जाने पर उन्हें कानून के तहत पूरी सुरक्षा प्रदान की जाती है जो उनसे कोई भी नहीं छीन सकता है और यह बात सुनिश्चित है, हाल के समय में ऐसे कुछ घटनाक्रम सामने आए हैं जिससे चिंता बढ़ी है।’’


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