नोटों पर लिखने का चलन बदस्तूर जारी

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Sunday, March 23, 2014-1:19 AM

नई दिल्ली: वाणिज्य एवं उद्योग मंडल एसोचैम के अनुसार करंसी नोटों पर लिखने, उन्हें गंदा करने अथवा स्वरूप बिगाडऩे की समस्या से पार पाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक को लोगों में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ सख्त संदेश भी देना चाहिए।

एसोचैम महासचिव डी.एस. रावत ने कहा, ‘‘खराब अथवा लिखे हुए नोट की समस्या का अंत केवल और केवल बैंक ही कर सकते हैं। रिजर्व बैंक की स्पष्ट मनाही के बावजूद करंसी नोट पर कुछ भी लिख देने का चलन बदस्तूर जारी है। खासतौर से देखा गया है कि बैंक कैशियर खुद ही नोट पर बिना हिचकिचाहट लिखते हैं। हालांकि बैंक अधिकारियों के अनुसार नोट पर लिखने वाले बैंक कर्मियों के खिलाफ जुर्माने का प्रावधान है लेकिन इसे अभी अमल में नहीं लाया गया है।

भारतीय स्टेट बैंक के उपमहाप्रबंधक एवं मंडल वित्तीय अधिकारी मनोतोष शर्मा रॉय ने इस संबंध में पूछे जाने पर कहा, ‘‘बैंक अपने कर्मचारियों को क्लीन नोट पॉलिसी के बारे में लगातार प्रशिक्षण देते हैं। स्टेट बैंक के देशभर में कई शिक्षण केन्द्र हैं, इनमें हम कर्मचारियों को नोट पर नहीं लिखने के बारे में शिक्षित करते हैं।’’ लोगों को भी करंसी नोट पर लिखने से बचना चाहिए। उन्होंने आगाह किया कि आने वाले दिनों में ऐसे नोट जिन पर लिखा होगा, उनका चलन बंद भी हो सकता है। 

सैंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के एक अधिकारी ने भी कहा कि नोट को साफ-सुथरा रखने और उन पर कुछ नहीं लिखने के बारे में कार्यशाला का आयोजन किया जाता है। बैंक में जो भी नोट ग्राहकों को जारी किए जाते हैं वे ‘करंसी चैस्ट स्तर’ पर परीक्षण और छंटाई के बाद ही जारी किए जाते हैं।


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