Business Talk: नेताओं को भारी पड़ेगी इंडस्ट्री की नाराजगी

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Sunday, March 23, 2014-3:30 PM

चंडीगढ़: इस बार लोकसभा चुनावों में नेताओं के सामने पंजाब की इंडस्ट्री एक बड़ी चुनौती है। पंजाब में अकाली-भाजपा सरकार और केंद्र में कांग्रेस की यू.पी.ए. सरकार के कारण पंजाब की इंडस्ट्री पर सबसे ज्यादा मार पड़ी। केंद्र सरकार ने पड़ोसी राज्य हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और उत्तरांचल आदि राज्यों को विशेष पैकेज के तहत केंद्रीय टैक्सों में छूट दे दी जबकि पंजाब की इंडस्ट्री को यह छूट नहीं मिली।

यह कारण है कि पिछले 10 साल के दौरान 7000 से छोटी-बड़ी इंडस्ट्री पंजाब से पलायन कर गईं और काफी बंद हो गईं। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल बार-बार मांग करते रहे कि पंजाब को भी विशेष पैकेज दिया जाए, लेकिन नहीं मिला। कांग्रेसियों का आरोप रहा है कि 2002 में जब 10 साल के लिए राज्यों को विशेष पैकेज दिया गया था, उस समय केंद्र में एन.डी.ए. की सरकार थी। उस दैारान शिअद भी उसमें शामिल था।

उस समय मुख्यमंत्री बादल ने क्यों विशेष पैकेज नहीं मांगा। बता दें कि 2012 में 10 साल पूरे होने के बाद केंद्र सरकार ने फिर से पहाड़ी राज्यों के लिए पैकेज की अवधि बढ़ा दी है। इससे पंजाब में उद्योगों के जरिए 24 लाख से ज्यादा जुड़े लोगों पर सीधा प्रभाव पड़ा है। ध्यान रहे कि सबसे ज्यादा इंडस्ट्री की संख्या लुधियाना में है। यहां हौजरी और स्माल स्केल इंडस्ट्री की करीब 3000 इकाइयों से 15 लाख से ज्यादा लोग जुड़े हैं।

मंडी गोबिंदगढ़ और सरहिंद में फर्नेस और स्टील इंडस्ट्री है। जिसकी 1500 यूनिटों में 3 लाख से ज्यादा लोग जुड़े हैं। जालंधर में खेल व चमड़ा इंडस्ट्री की 2000 इकाइयों में 2.5 लाख लोग जुड़े हैं। इसी तरह अमृतसर में सूती और गर्म कपड़ा उद्योग से एक लाख के करीब जुड़े हैं। शेष राज्य में भी हर जिले में मीडियम और स्माल स्केल के उद्योग से 3 लाख लोग जुड़े हुए हैं। वैसे तो सभी सीटों पर इन कर्मचारियों का प्रभाव है लेकिन लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, फतेहगढ़ साहिब आदि सीटों पर ज्यादा प्रभाव है। उद्योगपति ज्यादा टैक्स और विशेष पैकेज नहीं मिलने से दुखी हैं। इसके ऊपर राज्य सरकार ने प्रापर्टी टैक्स लगा दिया है। इन सीटों पर पार्टियों को उद्योगपतियों और कर्मचारियों की नाराजगी का शिकार होना पड़ सकता है।

किसानों को मुफ्त बिजली से उद्योगों पर मार
1997 में हुए चुनाव में पहली शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने सत्ता संभाली। पहले से ही बिजली की कमी झेल रही इंडस्ट्री पर तब बड़ी मार पड़ी जब सरकार ने किसानों को मुफ्त बिजली सुविधा देने का ऐलान कर दिया। इंडस्ट्री पर कट और बढ़ गए। अपने कार्यकाल में सरकार राज्य के उद्योगों को स्थापित करने के प्रयास नहीं कर पाई। खजाना खाली होने और आतंकवाद के समय का कर्ज सरकार के लिए परेशानी बना रहा।

2002 के विधानसभा चुनावों में जीत कर कांग्रेस ने अपनी सरकार बनाई। मुख्यमंत्री बनते ही कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने किसानों को दी जा रही मुफ्त बिजली सुविधा बंद कर दी। इसके बावजूद उद्योगों को पूरी बिजली देने में कांग्रेस सरकार फिर भी नाकाम रही। वोट बैंक खिसकता देख 2007 के चुनावों से कुछ महीने पहले कैप्टन अमरेंद्र ने फिर से किसानों को मुफ्त बिजली सुविधा देनी शुरू कर दी, लेकिन कांग्रेस 2007 का चुनाव हार गई। 2007 से सत्ता पर काबिज अकाली-भाजपा सरकार ने वोट बैंकों को बचाने के लिए किसानों को मुफ्त बिजली सुविधा तब से ही जारी रखी है।

सभी सरकारों के दावे साबित हुए खोखले
2002 में बनी कैप्टन अमरेन्द्र सिंह सरकार के समय एक लाख करोड़ से ज्यादा के मैगा प्रोजैक्ट पारित किए जाने का दावा किया गया लेकिन सरकार के 5 साल पूरे होने तक 14 हजार करोड़ रुपए के प्रोजैक्ट ही शुरू हो पाए थे। यही हाल 2007-2012 की अकाली-भाजपा सरकार का रहा। सरकार ने 80 हजार करोड़ रुपए के प्रोजैक्ट पारित किए हैं, 20 हजार करोड़ के ही प्रोजैक्ट सिरे चढ़ सके। अब अकाली-भाजपा सरकार का दावा है कि पंजाब प्रोग्रैसिव सम्मिट में उद्योगपतियों के साथ 65 हजार करोड़ रुपए के निवेश के समझौते हुए हैं। इससे पंजाब की तस्वीर बदल जाएगी।

माल एक्सपोर्ट के लिए प्रर्याप्त व्यवस्था नहीं
उद्योगपतियों को माल एक्सपोर्ट करने के लिए दूसरे राज्यों का सहारा लेना पड़ रहा है। फिलहाल एकमात्र अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट अमृतसर में है, एक्सपोर्ट के लिहाज से यहां पर भी तकनीकी काम नहीं हो पाया। मोहाली में इंटरनैशनल एयरपोर्ट स्थापित करने के दावे 7 साल से किए जा रहे हैं, अभी तक चार दीवारी से आगे काम नहीं बढ़ सका है। दूसरे राज्यों तक माल पहुंचाने के लिए लागत कर्च और बढ़ जाता है। इंडस्ट्री की पतली हालत होने के बावजूद राज्य सरकार ने ऐसा नेटवर्क स्थापित नहीं किया कि राज्य में माल का एस्पोर्ट आराम से हो सके।

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