खुफिया एजेंसियों ने चुनाव में काले धन के होने की आशंका जताई

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Sunday, March 30, 2014-4:41 PM

नई दिल्ली: देश में इस समय चल रहे चुनावी समर मेें काले धन का प्रवाह बढऩे की आशंका के मद्देनजर वित्तीय खुफिया एजेंसियों ने प्रतिभूतियों के संदिग्ध सौदों पर चौकसी बढा दी है। वित्त मंत्रालय की एजेंसी केंद्रीय आर्थिक खुफिया ब्यूरो (सीईआईबी) ने निजी नियोजन कार्यक्रम (पीपीपी) के जरिए धन के अवैध प्रवाह का पता लगाया है।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इसके तहत चुनिंदा लोगों या व्यक्तियों (इकाइयों) के समूहों को प्रतिभूतियों की पेशकश की जा सकती है। ऐसे लोगों की अधिकतम संख्या 50 तक हो सकती है। इसके अलावा वित्तीय खुफिया एजेंसी पार्टिसिपेटरी नोट्स (पी नोट्स) के जरिए होने वाले निवेश के दुरपयोग पर भी निगाह रखे हुए है। विदेशी संस्थागत निवेश भारतीय प्रतिभूतियों के आधार पर विदेशों में पी-नोट्स जारी करते हैं। ये ऐसी विदेशी इकाइयों से निवेश आकर्षित करने के लिए होते हैं जो भारत में पंजीकरण नहीं कराना चाहते। 

पीपीपी कार्यक्रम काले धन को सफेद करने के नए एक तरीके के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा है। सूत्रों ने बताया कि इसके तहत प्रतिभूतियों को आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के जारिए बेचने के बजाय उन्हें निवेशकों को सीधे तरजीही आधार पर आवंटन किया जाता है।

उन्होंने कहा कि पी-नोट्स का दुरुपयोग शेयर बाजार में काले धन के निवेश के लिए किया जा रहा है। प्रतिभूति किसी भी तरह का शेयर, बांड, डिबेंचर, रचि पत्र या मुनाफा हिस्सेदारी में भागीदारी हो सकती है। या फिर तेल, गैस या अन्य खनिज की रायल्टी अथवा लीज हो सकती है।


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