हम बेहतर कर रहे हैं, लेकिन यह काफी नहीं: जेतली

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Sunday, October 09, 2016-1:51 PM

वाशिंगटनः वित्त मंत्री अरुण जेतली ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया के अन्य देशों की तुलना में काफी बेहतर प्रदर्शन कर रही है लेकिन 'यह हमारे अपने ही पैमाने से कम है।' अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक तथा अन्य संबंधित संगठनों की वार्षिक बैठक में हिस्सा लेने के लिए आए जेतली ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भारत आज पहले से कहीं ज्यादा दुनिया का केंद्र बिंदु बन चुका है क्योंकि वह विपरीत परिस्थितियों में भी बेहतर करने के लिए प्रयत्नशील है लेकिन यह काफी नहीं है। उन्होंने कहा, 'पहले से कहीं ज्यादा हम केंद्र में हैं लेकिन साथ ही भारत की अपेक्षाएं पहले से ज्यादा बढ़ी हुई हैं। दुनिया के अन्य देशों की तुलना में हम काफी बेहतर कर रहे हैं लेकिन हमें लगता है कि हमारे अपने ही पैमाने पर देखा जाए तो यह काफी नहीं है।'

वित्त मंत्री ने कहा, 'हम और बेहतर कर सकते हैं जो एक तरह से अच्छा ही होगा। व्यग्र होना, अधीर होना बेहतरी की तलाश का संकेत है। जब हम इन विपरीत परिस्थितियों में भी और बेहतर करने के लिए प्रयत्नशील हैं तो दुनिया के अन्य देश इसे काफी प्रभावशाली मानते हैं। इसलिए भारत को लेकर वैश्विक स्तर पर काफी सरगर्मी है।'  उन्होंने उम्मीद जताई कि घरेलू तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर से जिस प्रकार निवेश आ रहे हैं मजबूत आर्थिक वृद्धि हमेशा बनी रहेगी। जी.एस.टी. तथा अन्य ढांचागत सुधार तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अर्थव्यवस्थाओं के गति पकडऩे का इस पर सकारात्मक असर होगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की सुस्ती कब तक बनी रहेगा अभी इसके बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता।  

जेतली ने वैश्विक आर्थिक सुस्ती को भारतीय अर्थव्यवस्था के समक्ष चुनौती बताते हुए कहा कि भारत ने इससे समांजस्य बिठाकर इन परिस्थितियों में भी विकास करना सीख लिया है लेकिन यदि वैश्विक अर्थव्यवस्था एक बार फिर वर्ष 2005 से 2008 के बीच की रफ्तार तक पहुंच जाए तो भारत की विकास की रफ्तार और बढ़ जाएगी। 

उल्लेखनीय है कि भारतीय रिजर्व बैंक, विश्व बैंक तथा अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने चालू वित्त वर्ष भारत की विकास दर 7.6 प्रतिशत पर रहने का अनुमान जताया है। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा, "हमने जिस प्रकार की आर्थिक गतिविधियां तथा निवेश की योजना बनाई है उसमें विकास दर में कमी की गुंजाइश नहीं बनती। उन्होंने उम्मीद जताई कि अच्छे मानसून तथा इसके बाद ग्रामीण समेत पूरी अर्थव्यवस्था में मांग में सुधार, वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने तथा ढांचागत सुधारों से विकास को और गति मिलेगी।  
 

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