'रियल एस्टेट क्षेत्र को साफ सुथरा बनाने के लिए स्टांप शुल्क कम करना जरूरी'

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Monday, November 14, 2016-2:35 PM

नई दिल्लीः कालेधन पर प्रहार और तेज करने के लिए वाणिज्य एवं उद्योग मंडल एसोचैम ने केन्द्र सरकार को सुझाव दिया है कि वह राज्यों को आवासीय और वाणिज्यिक संपत्ति पर लिए जाने वाले स्टांप शुल्क में भारी कमी लाए ताकि लोग खरीद मूल्य को कम मूल्यांकन करने से रोका जा सके।   

एसोचैम ने कहा है कि यदि राज्य सरकारें संपत्ति की खरीद-फरोख्त पर स्टांप शुल्क कम करतीं हैं तो इसका आवासीय और वाणिज्यिक संपत्तियों के खरीदारों को काफी लाभ मिलेगा। उद्योग मंडल ने कहा है, ‘‘संपत्तियों की खरीद फरोख्त में संपत्ति के कुल मूल्य का 30 से 40 प्रतिशत लेनदेन नकद में होता है, इसकी सबसे बड़ी वजह स्टांप शुल्क की ऊंची दर का होना है। एक से डेढ करोड़ रुपए फ्लैट लेने पर यदि 6-7 प्रतिशत की दर से भी स्टॉंप शुल्क आपको देना है तो पंजीकरण, वकील और दूसरे सरकारी शुल्कों सहित यह राशि 10 लाख रुपए के आसपास बैठती है।’’  

एसोचैम ने कहा है, ‘‘संपत्ति का पंजीकरण मूल्य ही विक्रेता के लिए उसके पूंजीगत लाभ कर को भी तय करता है। विक्रेता को पूंजीगत लाभ कर और स्टांप शुल्क दोनों के ही मामले में इससे काफी फायदा मिलता है कि वह पंजीकरण राशि को वास्तविक सौदे के मूल्य से कम से कम दिखाए।’’ उद्योग मंडल ने कहा है कि एेसे कई मामले देखने को मिले हैं जहां लोगों को जो कि साफ सुथरा जीवन जी रहे हैं। आयकर रिटर्न भर रहे हैं, उन्हें भी एेसे सौदों में अपने खाते से नकदी निकालकर लेन-देन करना पड़ता है।   एसोचैम के महासचिव डी.एस. रावत ने कहा है, ‘‘कुल मिलाकर प्रणाली कई बार आपको स्वच्छ पैसे को कालेधन में परिवर्तित करने के लिए मजबूर करती है। कोई इसे पसंद नहीं करता है लेकिन राज्यों को चाहिये कि वह आगे आएं और स्टांप शुल्क को कम से कम 50 प्रतिशत कम करें। एेसा करने से उनके राजस्व में वृद्धि होगी और कालाधन कम होगा।’’ 


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