रेडी टु मूव अपार्टमेंट्स खरीदना अधिक पसंद कर रहे हैं खरीदार

  • रेडी टु मूव अपार्टमेंट्स खरीदना अधिक पसंद कर रहे हैं खरीदार
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Friday, November 24, 2017-11:57 AM

नई दिल्लीः हाउसिंग प्रॉजेक्ट्स के पूरे होने में देरी और बिल्डर्स के डिफॉल्ट बढ़ने के कारण होम बायर्स अब अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी के बजाए रेडी-टु-मूव अपार्टमेंट्स खरीदना अधिक पसंद कर रहे हैं। यह ट्रेंड इस बात का संकेत है कि लोग अब तैयार रियल एस्टेट प्रॉजेक्ट्स से जुड़ी निश्चितता चाहते हैं और उनकी डेफर्ड पेमेंट की सुविधा देने वाले अंडर-कंस्ट्रक्शन अपार्टमेंट में ज्यादा दिलचस्पी नहीं है।

खरीदारों की गिनती बढ़ी
इसे देखते हुए रियल्टी कंपनियां भी अपने तैयार प्रॉजेक्ट्स को बेचने और लगभग पूरे हो चुके प्रॉजेक्ट्स को अंतिम रूप देने पर ध्यान दे रही हैं। इन कंपनियों का अभी नए प्रोजेक्ट लॉन्च करने पर जोर नहीं है। हीरानंदानी ग्रुप, टाटा हाउसिंग, लोढा डिवेलपर्स, एम्मार इंडिया और प्रेस्टीज एस्टेट्स जैसी रियल एस्टेट कंपनियों को इससे फायदा हो रहा है क्योंकि उनके पास मौजूद तैयार अपार्टमेंट्स के बायर्स बढ़ गए हैं।

अपार्टमेंट्स को अधिक पसंद कर रहे हैं खरीदार
हीरानंदानी ग्रुप के सीएमडी, निरंजन हीरानंदानी ने बताया, 'रेडी टु मूव प्रॉपर्टीज के लिए पिछली दो तिमाही काफी अच्छी रही हैं क्योंकि इन पर कोई जी.एस.टी. नहीं है और ये ऑक्युपेशनल सर्टिफिकेट (ओ.सी.) का पालन करती हैं। हमने अपने ठाणे के प्रॉजेक्ट में लगभग 200 यूनिट बेची हैं। रिस्पॉन्स अच्छा है क्योंकि मार्केट में अनिश्चितता को देखते हुए होम बायर्स ऐसे अपार्टमेंट्स को अधिक पसंद कर रहे हैं। इनके साथ रेरा और जी.एस.टी. से जुड़ी समस्या भी नहीं है।' बिना ऑक्युपेशनल सर्टिफिकेट वाले अंडर-कंस्ट्रक्शन रियल्टी प्रॉजेक्ट्स को हाल ही में लागू हुए रियल एस्टेट (रेग्युलेशन ऐंड डिवेलपमेंट) ऐक्ट  2016 के तहत रजिस्टर्ड करवाना जरूरी है। इन प्रॉजेक्ट्स पर 12 प्रतिशत का जीएसटी भी लगता है। 
 

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