विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि अक्तूबर में 2 साल के उच्चस्तर पर: PMI

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Tuesday, November 01, 2016-6:34 PM

नई दिल्ली: देश के विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर अक्तूबर में पिछले 22 माह के उच्चस्तर पर पहुंच गई। इस दौरान नए आर्डर, खरीद और उत्पादन गतिविधियों में तीव्र वृद्धि दर्ज की गई। भारत में विनिर्माण क्षेत्र के प्रदर्शन को मापने वाले ‘दि निक्केई मार्किट इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पी.एम.आई.)’ अक्तूबर में बढ़कर 54.4 पर पहुंच गया जबकि एक माह पहले सितंबर में यह 52.1 अंक पर था। यह वृद्धि देश के विनिर्माण क्षेत्र में जोरदार गतिविधियों को दर्शाती है। 

विनिर्माण क्षेत्र के प्रदर्शन मामले में 50 से ऊपर का अंक क्षेत्र में गतिविधियों के विस्तार को दर्शाता है जबकि इससे नीचे का अंक इसमें गिरावट का सूचक है। पी.एम.आई. की यह रिपोर्ट तैयार करने वाली आई.एच.एस. मार्कीट अर्थशास्त्री पॉलीयाना डे लिमा ने कहा, ‘‘अक्तूबर के आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर लाए हैं। इस दौरान विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादन और नए आर्डर में क्रमश: 46 और 22 माह में सबसे तेज गति से विस्तार दर्ज किया गया।’’

पी.एम.आई. रिपोर्ट के अनुसार अक्तूबर 2016 में उत्पादन में लगातार दसवें महीने वृद्धि दर्ज की गई, जबकि यह करीब 4 साल की सबसे तीव्र वृद्धि रही है। अध्ययन में भाग लेने वालों ने इस वृद्धि के लिए नए आर्डर की मजबूती को अहम बताया है। लीमा ने कहा, ‘‘पिछली तिमाही में अंतर्निहित वृद्धि की जो नींव पड़ी थी उसी के ऊपर यह क्षेत्र आगे बढ़ा है।’’ हालांकि, उन्होंने कहा है कि रिजर्व बैंक द्वारा मौद्रिक नीति को और सहज बनाने से मुद्रास्फीति जोखिम बढ़ा है।   

मौद्रिक नीति समिति (एम.पी.सी.) ने 2 दिन की समीक्षा के बाद 4 अक्तूबर को रेपो दर को 6.50 प्रतिशत से घटाकर 6.25 प्रतिशत कर दिया था। इस समिति में 3 सदस्य सरकार की तरफ से नामित हैं जबकि शेष सदस्य रिजर्व बैंक से हैं। एमपीसी की अगली बैठक 6 और 7 दिसंबर को होनी है। कीमतों के बारे में सर्वेक्षण में कहा गया है कि लागत बोझ बढऩे के असर को दाम बढ़ाकर उपभोक्ता तक पहुंचा दिया गया। वर्ष की समाप्ति की तरफ बढ़ते हुए यह रुझान बने रहने की संभावना है। विनिर्माताओं को काम के जो नए आर्डर मिले हैं उनमें अक्तूबर में काफी तेजी आई है और यह पिछले 22 माह के उच्चस्तर पर पहुंच गया। ‘‘नए कारोबार में घरेलू बाजार का अहम् योगदान रहा है, हालांकि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि इन आंकड़ों में निर्यात क्षेत्र का भी योगदान है।’’ 


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