महंगे पैट्रोल-डीजल के लिए हो जाएं तैयार

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Saturday, October 08, 2016-1:05 PM

नई दिल्ली: पिछले हफ्ते ओपेक देशों की बैठक में क्रूड प्रोडक्शन कटौती पर सहमति बनने के बाद इसकी कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। अमरीका में क्रूड इन्वैंट्री घटने से इसकी कीमतों को सपोर्ट मिला है। अगले महीने ओपेक देशों की बैठक में क्रूड प्रोडक्शन कटौती की रूपरेखा पेश की जाएगी। इसके बाद क्रूड कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। इसका बड़ा असर ग्लोबल इकोनॉमी के साथ भारत पर भी पड़ेगा। भारत अपनी जरूरत का अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है। क्रूड महंगा हुआ तो भारत का इम्पोर्ट बिल बढ़ेगा जिससे व्यापार घाटा बढ़ सकता है। लिहाजा सरकार का बजट बिगड़ सकता है। कच्चे तेल का सीधा असर आपकी जेब पर भी होगा क्योंकि पैट्रोल-डीजल के भाव एक बार फिर बढ़ जाएगा।

क्या हुआ अल्जीरिया बैठक में 
अल्जीरिया में हुए समझौते के मुताबिक ओपेक देश क्रूड प्रोडक्शन 3.34 करोड़ बैरल प्रतिदिन से घटाकर 3.25-3.3 करोड़ बैरल पर लाएंगे। ओपेक देशों में सबसे ज्यादा क्रूड प्रोडक्शन करने वाला देश सऊदी अरब 35 लाख बैरल प्रतिदिन क्रूड प्रोडक्शन घटाएगा। वहीं दूसरे ओपेक देशों का प्रोडक्शन घटाने का अंतिम प्रस्ताव भी लाया जाएगा। 30 नवम्बर को वियना में होने वाली ओपेक देशों की बैठक में इस पर ठोस फैसला लिया जाएगा। 

7.10 डॉलर बढ़ सकते हैं भाव 
ओपेक देशों के बीच क्रूड प्रोडक्शन में कटौती पर सहमति बनने के बाद गोल्डमैन साक्स ने इसकी कीमतों में 7.10 डॉलर प्रति बैरल बढ़ौतरी की उम्मीद जताई है। 28 सितम्बर को जारी अपनी रिपोर्ट में गोल्डमैन साक्स ने आने वाले कुछ महीनों में बाजार अनिश्चितता का माहौल बने रहने की बात कही थी। गोल्डमैन साक्स ने कहा था कि 2016 अंत तक क्रूड 43 डॉलर प्रति बैरल और 2017 में 53 डॉलर प्रति बैरल रहेगा।

60 डॉलर तक जाएगा क्रूड का भाव 
सिटी ग्रुप ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इस साल के अंत तक क्रूड कीमतें 40.50 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहने का अनुमान है जबकि 2018 तक इसकी कीमतें औसत 60 प्रति बैरल के आसपास ट्रेड करेंगी। 

ओपेक बैठक के बाद 12 प्रतिशत महंगा हुआ क्रूड 
ओपेक देशों की बैठक के बाद से अब तक क्रूड के भाव में 12 प्रतिशत की तेजी दर्ज की जा चुकी है। 27 सितम्बर को ब्रेंट क्रूड का भाव 45.97 डॉलर प्रति बैरल था जबकि गुरुवार को इसके भाव ने 51.86 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छुआ। अमरीका में इन्वैंट्री डाटा घटने से क्रूड कीमतों में तेजी देखने को मिली। 

क्यों आ रही है क्रूड में तेजी
ओपेक देशों में क्रूड प्रोडक्शन कटौती पर सहमति बनने के बाद से इसमें लगातार तेजी का सिलसिला जारी है। हाल में अमरीका में क्रूड भंडार घटने की खबरें आईं जिसके बाद क्रूड में और गिरावट देखने को मिल रही है।

अपस्ट्रीम कम्पनियों को होगा फायदा 
ग्लोबल रिसर्च के ए.वी.पी. उमेश शर्मा ने बताया कि क्रूड कीमतें बढऩे से जहां क्रूड खोजने वाली कम्पनी ओ.एन.जी.सी.ए. केयर्न इंडिया, ऑयल इंडिया को फायदा होगा वहीं एच.पी.सी. एल.ए., बी.पी.सी.एल. और आई.ओ.सी. जैसी तेल बेचने वाली कम्पनियों को घाटा होगा। दूसरी ओर ऑयल रिफाइनरी और रिटेल पैट्रोलियम प्रोडक्ट बेचने वाली कम्पनी रिलायंस इंडस्ट्रीज पर भी इसका पड़ेगा। क्रूड में कितनी तेजी आएगी उसके मुताबिक रिलायंस पर असर पड़ेगा। क्रूड की कीमतें अगर और बढ़ती हैं तो भारत की इकोनॉमी को इसका नुक्सान उठाना पड़ सकता है।


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