ग्रुप को आगे ले जाने के तरीकों पर मिस्त्री और टाटा में नहीं थी एकराय!

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Tuesday, October 25, 2016-4:50 PM

मुंबईः टाटा सन्स के चेयरमैन साइरस मिस्‍त्री को उनके पद से हटाए जाने के टाटा ग्रुप ने रतन टाटा को 4 महीने के लिए अंतरिम चेयरमैन अप्वाइंट किया है। इस खबर से टाटा ग्रुप के हेडक्वॉर्टर बॉम्बे हाउस में लोग हैरान रह गए हैं। कुछ लोगों का मानना है कि परफॉर्मेंस से जुड़े मुद्दों के कारण मिस्त्री की अचानक विदाई हुई, हालांकि ग्रुप के अधिकारियों की राय इस पर बंटी हुई दिखी। यह भी कहा जा रहा है कि टाटा संस उनकी नीतियों से सहमत नहीं थे। खासतौर पर घाटे या कम मुनाफे में चल रही फर्म्स को बंद करने के फैसले से वह खुश नहीं थे लेकिन टाटा ग्रुप की ओर से इसकी कोई ठोस वजह नहीं बताई गई।

कंपनी के कुछ अधिकारियों से बात करने पर पता चला कि इस कदम से शॉर्ट टर्म में ग्रुप की प्रोग्रेस प्रभावित होगी। एक अधिकारी ने कहा, 'मिस्त्री की कमान में ग्रुप ने एक दिशा पकड़ी थी। अभी असुरक्षा का माहौल है। इसे दूर करने के लिए रतन टाटा को सभी स्तरों पर कर्मचारियों को भरोसा दिलाना होगा।' ग्रुप के सिस्टम से वाकिफ कई पुराने लोगों ने कहा कि रतन टाटा इस ग्रुप की सोच और संस्कृति को गहराई से समझते हैं और वह ऐसा चेयरमैन लाना चाहेंगे जिनकी सोच उनके नजरिए के मुताबिक हो। टाटा ग्रुप को ऐसे चेयरमैन की जरूरत है जो इसके मूल्यों और कार्य संस्कृति को ध्यान में रखते हुए बदलाव करे। ग्रुप के एक अधिकारी ने कहा, 'जिन मामलों में वैश्विक स्तर पर साख की बात हो, उनमें कड़े फैसले किए बिना भी आप प्रगति कर सकते हैं।'

टाटा ग्रुप के एक अन्य सीनियर ऑफिसर ने कहा, 'पीएंडजी, एजी लैफली जैसी दूसरी ग्लोबल कंपनियों में भी पूर्व चेयरमैन को कंपनी की किस्मत बदलने के लिए वापस लाया गया था। टाटा ग्रुप में मामला जटिल है।' एक अधिकारी ने कहा कि इस फैसले से  यह चिंता भी जताई जा रही है कि मिस्त्री ने जिन लोगों को अपॉइंट किया था, उनको भी अपनी नौकरी से हाथ धोना न पड़ जाए। अधिकारियों के मुताबिक, मिस्त्री ने कहा था कि ग्रुप की कंपनियों को अपने स्तर से आगे बढ़ने की कोशिश करनी होगी और कई बड़े कदम उठाने होंगे। अधिकारियों ने कहा कि मिस्त्री के इस बयान को पूर्व चेयरमैन ने ठीक नहीं माना। एक अधिकारी ने कहा, 'इस ग्रुप को आगे ले जाने की सोच के बारे में दोनों लीडर्स में बड़ा टकराव रहा है। 

ग्रुप में मिस्त्री और रतन टाटा के प्रति निष्ठा को लेकर भी अलग-अलग विचार दिख रहे हैं। मामले की जानकारी रखने वाले एक टॉप ऑफिशल ने कहा, 'मिस्त्री की लीडरशिप और उनके परफॉर्मेंस में ग्रुप का मार्कीट कैपिटलाइजेशन बहुत तेजी से बढ़ रहा था। रतन टाटा इस ग्रुप के सुप्रीम कस्टोडियन हैं। हालांकि उनकी सोच और कारोबार करने का उनका तरीका मिस्त्री के सिद्धांतों से मेल नहीं खाता है।' उन्होंने कहा, 'यह मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव जैसी सत्ता की लड़ाई नहीं है। इसके बजाय यह ग्रुप से जुड़े लोगों की राय का मसला है कि इसे कैसे आगे ले जाना है।'
 


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