विकास की यात्रा में डाबर का बड़ा कदम

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Wednesday, October 12, 2016-4:22 PM

देश की सबसे बड़ी आयुर्वेदिक हैल्थकेयर कंपनी डाबर इंडिया लि. विज्ञान एवं बुद्धि की सदियों पुरानी परंपरा का प्रयोग करके आधुनिक आयुर्वेद के विकास की अपनी यात्रा में बड़ा कदम उठा रही है। कंपनी दुर्लभ जड़ी-बूटियों के सबसे बड़े थोक उत्पादक बनने की यात्रा पर निकल पड़ी है। वित्त-वर्ष 2016-17 के अंत तक इन औषधियों के विकास के लिए कंपनी ने देश में 3800 एकड़ भूमि पर काम करना शुरू कर दिया है।

इससे देश में डाबर इंडिया लि. के द्वारा दुर्लभ जड़ी-बूटियों को उगाने के लिए प्रयोग की जाने वाली भूमि लगभग दोगुनी हो जाएगी। धरती के सबसे कठिन स्थान लेह-लद्दाख सहित भारत के 8 राज्यों फैले इस अभियान में स्थानीय किसान एवं आदिवासी समुदाय शामिल होंगे और ये लगभग 2500 किसानों को लाभान्वित करेंगे।

कोलकाता की गलियों में आयुर्वेदिक दवाई निर्माता के रूप में शुरूआत करने के बाद डाबर एक ट्रांसनेशनल एफएमसीजी कंपनी के रूप में तब्दील हो गई। बदलाव की इस यात्रा को आयुर्वेद की डाबर की संपन्न विरासत एवं प्रकृति की गहन जानकारी से मदद मिली। डाबर ने मौलिक आयुर्वेदिक ग्रंथों के इस परंपरागत ज्ञान का उपयोग आधुनिक विज्ञान के साथ किया और ऐसे उत्पाद विकसित किए, जिन्हें हर पीढ़ी के उपभोक्ता पसंद करते हैं।

डाबर इंडिया लि. के हेड- बीआरडी, डॉ. बाबा ने कहा, ‘‘विश्व की सबसे बड़ी आयुर्वेदिक उत्पाद निर्माता कंपनी डाबर पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में विश्वास करती है और इसीलिए बायोरिसोर्सेस डेवलपमेंट (बीआरडी) अभियान के द्वारा पर्यावरण की समस्याओं का समाधान करने के लिए काम कर रही है। कंपनी ने पंतनगर (उत्तराखंड) में पूर्णतः ऑटोमेटेड अत्याधुनिक ग्रीनहाउस स्थापित किया है। यह ऑपरेशंस के स्केल की दृष्टि से अपनी तरह का पहला ग्रीनहाउस है एवं केवल औषधीय पौधों के लिए समर्पित है। यह सुविधा किसानों को पौधों के लिए उच्च कोटि की सामग्री की आपूर्ति करती है, जिससे किसान बड़े स्तर पर गुणवत्तायुक्त औषधीय पौधे उगा पाते हैं। आज हम बायो रिसोर्सेस डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत दुर्लभ जड़ीबूटियों और पौधों की 19 किस्मों का विकास कर रहे हैं।

डाबर ने अपने कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग प्रोजेक्ट्स के तहत एक निष्पक्ष एवं पारदर्शी प्रक्रिया का निर्माण किया है। यह बड़े स्तर पर मार्जिनल किसानों को लगाकर उन्हें सुदृढ़ आर्थिक अवसर प्रदान करता है एवं साथ ही प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करने में भी मदद करता है। डाबर के ग्रीनहाउस में विकसित उच्च कोटि की प्लांटिंग सामग्री खेती के लिए किसानों को दी जाती है और बाद में कंपनी के द्वारा पारस्परिक समझौते के तहत वापस ले ली जाती है। डाबर इस अभियान के साथ देश में जड़ीबूटियों का सबसे बड़ा निर्माता बन गया है। कंपनी ने साल 2015-16 में अपने ग्रीनहाउस से किसानों को दुर्लभ जड़ीबूटियों की लगभग 7.5 लाख सैपलिंग विकसित करके वितरित कीं। 


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