MST होने के बावजूद वसूला जुर्माना, अब GM व टिकट निरीक्षक देंगे हर्जाना

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Friday, January 12, 2018-10:32 AM

बिलासपुर : रेलवे ने एम.एस.टी. होने के बावजूद भी यात्री को जुर्माना किया जिसे जिला उपभोक्ता फोरम ने सेवा में कमी माना है। इसके लिए उसने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक व टिकट निरीक्षक को संयुक्त रूप से 20,000 रुपए हर्जाना लगाया है। साथ ही वसूली गई जुर्माने की राशि भी एक माह के अंदर लौटाने का आदेश दिया है।

क्या है मामला
अकलतरा निवासी मुकेश कुमार श्रीवास ने अकलतरा से बिलासपुर आने-जाने के लिए दैनिक यात्रा पास एम.एस.टी. बनवाया था। एम.एस.टी. 31 जनवरी 2015 तक वैध था। आवेदक 23 जनवरी 2015 को लोकल ट्रेन से बिलासपुर पहुंचा। स्टेशन से बाहर निकलने लगा तभी गेट में खड़ी टिकट निरीक्षक अर्चना साकरे ने टिकट दिखाने के लिए कहा।

इस पर आवेदक ने अपना एम.एस.टी. पास दिखाया। निरीक्षक ने पास को नकारते हुए उसे बिना टिकट मानकर 270 रुपए जुर्माना वसूल किया। इस कार्रवाई के खिलाफ  मुकेश ने डी.आर.एम. से शिकायत की। कार्रवाई नहीं होने पर दपूमरे के जी.एम. व टिकट निरीक्षक अर्चना साकरे के खिलाफ  उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 12 के तहत जिला उपभोक्ता फोरम में परिवाद प्रस्तुत कर क्षतिपूर्ति दिलाने की मांग की।

यह कहा फोरम ने
नोटिस पर जी.एम. व टिकट निरीक्षक की ओर से संयुक्त रूप से जवाब प्रस्तुत कर परिवाद का विरोध किया गया। जवाब में कहा गया कि जांच के दौरान आवेदक ने अपना पहचान पत्र नहीं दिखाया था। इस कारण से उसे बिना टिकट मानकर जुर्माना लिया गया है। जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष अशोक कुमार पाठक, सदस्य प्रमोद वर्मा व रीता बरसैया ने एम.एस.टी. होने के बावजूद यात्री से जुर्माना वसूलने को सेवा में कमी माना है। फोरम ने जी.एम. व टिकट निरीक्षक को एक माह के अंदर वसूली गई जुर्माना राशि 270 रुपए लौटाने, 20,000 रुपए मानसिक क्षतिपूर्ति  राशि तथा 1000 रुपए वाद व्यय देने का आदेश दिया है।

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