देश की 250 मंडी ई नाम योजना से जुड़ीं: राधामोहन 

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Friday, October 07, 2016-3:02 PM

नई दिल्लीः किसानों के उत्पादों को बेहतर मूल्य दिलाने तथा पारदर्शी विपणन के लिए देश के 10 राज्यों की 250 मंडी कल तक राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई नाम) से जुड़ गए और मार्च 2018 तक 585 मंडियों को इस योजना से जोडऩे का प्रयास तेज कर दिया गया है। इन मंडियों में आन लाइन व्यापार किया जा सकेगा।   

कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि आन्ध्र प्रदेश के 12,छत्तीसगढ़ के 05, गुजरात में 40, हिमाचल प्रदेश में 07, हरियाणा में 36, झारखंड में 8, मध्य प्रदेश में 20, राजस्थान में 11, तेलंगाना में 44 तथा उत्तर प्रदेश में 67 मंडी इ नाम योजना से जुड़ गए हैं। अब तक 14 राज्यों ने 399 मंडियों को इस योजना से जोडऩे का प्रस्ताव किया है जिसकी स्वीकृति दे दी गई है। इस वर्ष 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस योजना की शुरूआत की थी और 8 राज्यों की 23 मंडियों को पायलट परियोजना में शामिल किया गया था। इस योजना के तहत 160229 किसानों, 46688 व्यापारियों तथा 25970 कमीशन एजेंटों का पंजीकरण किया गया है। 

सिंह ने बताया कि इस योजना के तहत ढांचागत संरचना तथा प्रयोगशालाओं के निर्माण के लिए प्रति मंडी 30 लाख रुपए की सहायता राशि दी जाती है। इसके अलावा इ नाम साफ्टवेयर तथा एक वर्ष के लिए सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ भी उपलब्ध कराया जाता है। ई नाम के माध्यम से अब तक 421 करोड़ रुपए का कारोबार हो चुका है।  राष्ट्रीय कृषि बाजार में फलों, सब्जियों, मसालों, अनाजों, दलहन और तिलहन समेत 69 जिन्सों का व्यापार किया जा रहा है तथा अन्य कृषि उत्पादों को इस व्यवसाय से जोड़ा जाएगा। कृषि मंत्री ने बताया कि मंडी में मछली के व्यापार की भी योजना है।

सिंह ने बताया कि 17 राज्यों तथा एक केन्द्र शासित क्षेत्र ने मंडी कानून में बदलाव किया है जिनमें आन्ध्र प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान, गोवा, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, मिजोरम, पंजाब, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड , झारखंड, नागालैंड, हरियाणा और चंडीगढ़ शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बिहार और केरल में मंडी कानून नहीं हैं, इन दोनों राज्यों से किसानों के व्यापक हित में मंडी कानून बनाने का अनुरोध किया गया है। बिहार और केरल के अधिकारियों की इस सिलसिले में 14 अक्तूबर को बैठक बुलाई गई है। पश्चिम बंगाल ने आन लाइन व्यापार के लिए इ नाम साफ्टवेयर की मांग की है। उन्होंने सभी राज्यों से मंडी कानून में बदलाव करने का अनुरोध किया ताकि किसानों को इसका लाभ मिल सके। 


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