राशन की दुकानों को माइक्रो ATM बनाना चाहती है सरकार

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Monday, November 21, 2016-1:20 PM

नई दिल्लीः मोदी सरकार ने फैसला किया है कि अगले 2 साल में देश की 5 लाख राशन की दुकानों पर जो इलैक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल (EPOS) लगाए जाने हैं, वह माइक्रो ए.टी.एम. की तरह भी काम करेंगे। नोटबंदी के बाद पर्याप्त ए.टी.एम. नहीं होने के कारण ग्रामीण इलाकों में लोगों को जिस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, उस लिहाज से यह कदम बेहद अहम माना जा है।

सूत्रों के अनुसार वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ फाइनैंशल सर्विसेज ने इस सिलसिले में प्रधानमंत्री के नोटबंदी ऐलान से एक दिन पहले यानी 7 नवंबर को राज्यों को सर्कुलर भेजा था। इसमें राशन की दुकानों को इलैक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल के जरिए फाइनैंशल इन्क्लूजन को सपोर्ट करने और माइक्रो-ए.टी.एम. डबल करने की बात कही गई थी। कई राज्य इन मशीनों को हासिल करने की प्रक्रिया में हैं, जिससे राशन दुकानों को आधार बायोमीट्रिक सिस्टम के जरिए ऑटोमेटिक तरीके से सबसिडी का राशन देने में मदद मिलेगी। EPOS मशीनों को एक बार माइक्रो ए.टी.एम. की तरह काम करने लायक बनाने के बाद लोग अपने डैबिट या रूपे कार्ड्स से राशन दुकानों से पैसे निकालने के अलावा बाकी ट्रान्जैक्शंस भी कर सकते हैं।

देश में सिर्फ 2 लाख ए.टी.एम. हैं और इनमें से कुछ ही ग्रामीण इलाकों में मौजूद हैं। नोटबंदी के मौजूदा अभियान के दौरान यह गड़बड़ी खुलकर सामने आई। गांवों के लोगों को अपने पुराने नोट बदलने या पैसा वापस लेने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। मौजूदा नोटबंदी अभियान में केंद्र सरकार ने बैंकों को ग्रामीण इलाकों में माइक्रो ए.टी.एम. और बैंक मित्र तैनात करने को कहा, ताकि घर-घर जाकर कैश निकासी में लोगों की मदद की जा सके।

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