सरकार लक्ष्य से पहले ही बंद कर सकती है गेहूं की खरीद

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Monday, May 15, 2017-12:26 PM

नई दिल्लीः अब तक जताए गए तमाम अनुमानों के अनुसार 2017-18 में गेहूं खरीद करीब तीन करोड़ टन रहने की संभावना है। यह 3.3 करोड़ टन के आरंभिक लक्ष्य से कम है। केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने अंतिम खरीद का आंकड़ा तीन करोड़ टन के आसपास रहने का अनुमान जताया है और कहा है कि इसका स्टॉक पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि खरीद पिछले साल की तुलना में अधिक है तथा सरकार के पास पर्याप्त स्टॉक है। अब तक सरकार 2.7 करोड़ टन गेहूं जुटा चुकी है जो पिछले साल के 2.3 करोड़ टन की तुलना में अधिक है। अगर अंतिम खरीद 3.3 करोड़ टन से कम रहती है तो यह लगातार ऐसा दूसरा वर्ष होगा जिसमें सरकार अपने लक्ष्य से कम रहेगी।

अब तक 59 लाख टन गेहूं खरीदी
अगर सरकारी अधिकारियों और व्यापारियों पर विश्वास करें तो मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में निजी व्यापारियों की ओर से ऊंची कीमत की पेशकश की गई है जिसने उन्हें सरकारी खरीद केंद्रों से दूर रहने के लिए प्रेरित किया है। अब तक सरकार ने 85 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले किसानों से 59 लाख टन गेहूं खरीदी है। उत्तर प्रदेश में सरकार ने 30 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले 15.9 लाख टन की खरीद की है। सरकार तीन करोड़ टन गेहूं से कम पर ही खरीद को बंद कर सकती है। मध्य प्रदेश में व्यापारियों का कहना है कि खरीद के लिए किसानों का वास्तविक पंजीकरण सामान्य से लगभग 40 प्रतिशत कम था क्योंकि ज्यादातर उत्पादकों ने अपना गेहूं निजी व्यापारियों को बेचने को तरजीह दी जो उन्हें सरकारी खरीद केंद्रों की तुलना में नकद भुगतान कर रहे हैं।

सरकारी केंद्रों में भुगतान प्रक्रिया धीमी रहती है। उन्होंने यह भी कहा कि निजी व्यापारियों द्वारा कीमत की पेशकश 1,650 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य से करीब 200-300 रुपये प्रति क्विंटल ज्यादा थी। राज्य के अधिकारियों का अनुमान है कि इस साल गेहूं खरीद 70 लाख टन रह सकती है जो सरकारी लक्ष्य से 15 लाख टन कम है। हालांकि अब कीमतें नरम हो चुकी हैं लेकिन पंजीकरण दोबारा शुरू नहीं किया गया है।

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