जनवरी में जारी होगी अरहर की नई किस्म पूसा-16: जेतली

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Monday, October 31, 2016-6:50 PM

नई दिल्लीः सरकार ने आज कहा कि वह कम अवधि में तैयार होने वाली अरहर की नई किस्म पूसा-16 जनवरी तक जारी करेगी। अरहर की इस नई किस्म की प्रायोगिक खेती चल रही है। देश में अरहर का उत्पादन मांग से कम है इसका उत्पादन और आपूर्ति बढ़ाने के प्रयासों के तहत दलहनों की जल्दी तैयार होने वाली और अधिक उपज देने वाली किस्मों के विकास का प्रयास किया जा रहा है।  

उम्मीद है कि नई किस्म की अरह से अगले 3 साल में देश को दालों के मामले में आत्म निर्भरता हासिल करने में मदद मिलेगी। वित्त मंत्री अरुण जेतली ने आज यहां भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आई.ए.आर.आई.) का दौरा किया जहां अरहर की नई किस्म की प्रायोगिक खेती की जा रही है। उन्होंने नई किस्म की अरहर की प्रायोगिक फसल का निरीक्षण करने के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम अरहर की इस नई किस्म (पूसा-16) को जल्द ही वाणिज्यिक खेती के लिए पेश करेंगे। जैसे ही इसकी वाणिज्यिक खेती में इस्तेमाल शुरू होगा निश्चित तौर पर इसका काफी प्रभाव होगा।’’  

देश में दालों का उत्पादन इनकी कुल मांग 2.30 से 2.40 करोड़ टन के मुकाबले कम है। पिछले 2 साल देश में सूखा पडऩे की वजह से दालों का उत्पादन घटा है। उत्पादन घटने से हाल में दालों के दाम आसमान छूने लगे थे। इसे देखते हुए महंगाई पर काबू पाने के लिए सरकार को अनेक उपाय करने पड़े। जेतली ने कहा कि अरहर की इस नई किस्म से पूरे देश को काफी फायदा होगा।

जेतली ने कहा कि पिछले 2 साल के दौरान दालों की तंगी को लेकर सरकार में काफी चिंता रही। उन्होंने कहा, ‘‘इसके पीछे वजह यह रही है कि दालें हमारे खाने का मुख्य अंश हैं। हमारे खाने में सबसे ज्यादा प्रोटीन दालों से ही आता है। हम न केवल दालों के सबसे बड़े उत्पादक हैं बल्कि सबसे बड़े उपभोक्ता और आयातक भी हैं। इसलिए यहां इसकी कमी है।’’ सरदार वल्लभभाई पटेल के जन्मदिन पर आई.ए.आर.आई. द्वारा आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस कार्यक्रम में जेतली ने कहा, ‘‘पिछले 2 साल के दौरान हमारी सरकार का यह प्रयास रहा है कि दलहानों की खेती को इस तरह से प्रोत्साहन दिया जाए जिससे उत्पादन बढ़ाया जा सके और इस साल यह प्रत्यक्ष हो रहा है।’’  

उन्होंने कहा कि मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमणियम यह सुझाव देते रहे हैं कि सरकार को ऊंचे न्यूनतम समर्थन मूल्य और बोनस देकर दलहन की खेती को प्रोत्साहित करना चाहिए। जेतली ने कहा, ‘‘यहां तक कि कृषि मंत्रालय भी इसके लिए जोर देता रहा है। हमने इसका परिणाम देखा है और हम उत्पादन में वृद्धि देख रहे हैं। यह इस साल भी प्रत्यक्ष दिख रहा है।’’


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