150 साल पुराने कानून ने बेटी को दिलवाया इंसाफ

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Wednesday, October 04, 2017-1:41 PM

अहमदाबादः गुजरात हाई कोर्ट ने धर्म बदलकर मुस्लिम व्यक्ति से शादी करने वाली हिन्दू लड़की को उसके पिता की पैतृक संपत्ति में अधिकार देने का आदेश देकर एतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने फैसला नसीमबानो फिरोजखान पठान (उर्फ नैनाबेन भीखाभाई पटेल) की याचिका के बाद सुनाया है। बता दें कि डेढ़ सौ साल पुराने कानून की मदद से हिंदू महिला अपने पिता की संपत्ति में हिस्से से वंचित होने से बच गई।

150 साल पुराना कानून आया काम
न्यायाधीश जेबी पर्दीवाला ने आदेश में कहा कि लड़की का “हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम” के तहत पिता की पैतृक संपत्ति में हिस्सा होगा। कोर्ट ने साफ किया कानून में धर्म बदलने पर वारिस को पैतृक संपत्ति से वंचित रखने का कोई प्रवधान नहीं है। यह केवल धर्म बदलकर शादी करने वालों के बच्चों को उनके हिन्दू रिश्तेदारों की संपत्ति के उत्तराधिकार लेने से वंचित करता है।” कोर्ट ने कहा जाति अयोग्ता निवारण एक्ट,1850 की धारा 1 कहती है कि एेसी परंपराएं और कानून जो धर्म बदलने और जाति समाप्त हो जाने की स्थिति में अधिकार या संपत्ति से अलग करते हैं , लागू नहीं किए जाएंगे। कोर्ट ने कहा कि धर्म बदलने और जाति समाप्त हो जाना एक समय में संपत्ति जब्त करना तथा उत्तराधिकार से वंचित करने के आधार माने जाते थे। लेकिन एक्ट 1850 का कानून पास होने के बाद एेसा नहीं है।

कोर्ट ने दिया यह आदेश
हाई कोर्ट ने राज्य के राजस्व विभाग को आदेश दिया कि महिला के पिता के उत्तराधिकारियों में उसका नाम भी शामिल किया जाए। राजस्व विभाग ने महिला का नाम उत्तराधिकारियों की सूची से यह कहकर हटा दिया था कि वो मुसलमान बन चुकी है इसलिए वो अपने पिता की वारिस नहीं रही। गुजरात के वडोदरा की रहने वाली नसीमबानो फिरोजखान पठान (उर्फ नैनाबेन भीखाभाई पटेल) ने फिरोज खान से 11 जुलाई 1990 को शादी की और वो मुसलमान बन गई। करीब 14 साल के बाद उसके पिता का साल 2004 में निधन हो गया। नसीमबानो फिरोजखान पठान (उर्फ नैनाबेन भीखाभाई पटेल) के पिता की गांव में काफी जमीन थी, लेकिन उसके भाई-बहनों ने उसका वारिसों की सूची से नाम निकाल दिया था।
 

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