5 दिनों में गेहूं की कीमत 2400 रु. तक, 60% बढ़ौतरी

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Saturday, November 19, 2016-1:54 PM

नई दिल्लीः सरकार के तमाम दावों को खोखला बताते हुए गेहूं की कीमतें रिकार्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। मई-जून में एमएसपी स्तर 1525 रुपए से आते-आते शुक्रवार को दिल्ली की मंडियों में गेहूं 2400 रुपए प्रति क्विंटल तक बोला गया। कमोबेश देश के लगभग सभी बाजारों में यही हालत बनी हुई है। इसके लिए देश में गेहूं प्रोडक्शन कम तो है ही साथ ही सप्लाई व प्राइस कंट्रोल को अपनाई जा रही सरकारी नीतियां ज्यादा जिम्मेदार मानी जा रही हैं। पिछले दिनों गेहूं पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाने का फैसला भी बेअसर हो गया। इसके अलावा अचानक 5 दिनों में आई 200 से 250 रुपए की तेजी को पिछले दिनों सरकार का नोट बंदी का घटनाक्रम भी माना जा रहा है। इससे सप्लाई पर बहुत बड़ा असर आया है।

नोट बैन से बाधित हुई सप्लाई 
गत 8 नवंबर को नोट बंदी की घोषणा से पहले गेहूं की कीमतें 1900 रुपए से लेकर 2100 रुपए के बीच बनी हुई थीं। लेकिन, अगले दिन से 1000 रुपए और 500 रुपए के नोट बंद होने से सप्लाई पर दबाव बनना शुरू हो गया। मंडियों में गेहूं की खरीद कैश में ही होती है सो, गेहूं खरीद में बाधा आने लगी। नरेला अनाज मंडी दिल्ली के व्यापारी विरेंद्र देशवाल ने बताया कि पिछले एक सप्ताह के भीतर ही गेहूं की कीमतें 300 रुपए से भी ज्यादा तेज हो गईं। शुक्रवार को शाम 5 बजे बंद हुई मंडी में 2400 रुपए प्रति क्विंटल तक गेहूं की खरीद हो सकी। वह भी ज्यादातर उधार या चेक के जरिए।

टेंडर प्रक्रिया भी कीमतों के बढ़ने का कारण
गेहूं को लेकर शुरूआत से ही सरकार और फ्लोर इंडस्ट्री के बीच असावधानी का माहौल रहा। सरकार उपरी तौर पर ही गेंहू प्रोडक्शन के आंकड़े प्रस्तुत करती रही। इसके बाद में ओपन मार्कीट सेल के नियमों में ही बदलाव कर दिया। पहले एमएसपी से सरकार अपना मुनाफा तय करके फ्लोर मिलों को गेहूं बेचती थी लेकिन, इस साल इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई। फ्लोर मिल संचालक दिल्ली के विरेश गोयल का कहना है कि टेंडर में 2300 से 2400 रुपए के रेट बोले जा रहे हैं। यह भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है गेहूं की कीमतें बढ़ने का।
 


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