Income Tax Dept के निशाने पर ज्यूलर, सर्च आप्रेशन तेज

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Thursday, May 18, 2017-12:30 PM

नई दिल्र्ली: इंकम टैक्स विभाग के निशाने पर ज्यूलर हैं। विभाग ने इनके खिलाफ सर्च आप्रेशन तेज कर दिया है। विभाग को जानकारी मिली है कि ज्यूलर्स अपने पुराने गोल्ड स्टाक को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं, इसके लिए फर्जी बिल बनाए जा रहे हैं और गोल्ड को कैश में गैर-कानूनी तरीके से बिना बिल के बेचा जा रहा है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार ज्यूलर्स ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि नोटबंदी के दौरान गैर-कानूनी तरीके से काफी मात्रा में गोल्ड भारत में लाया गया। इसका इस्तेमाल ब्लैकमनी को व्हाइट करने के लिए हुआ।

पुराने नोट के बदले गोल्ड दिया गया। यही कारण है कि अब इंकम टैक्स विभाग यह जानना चाहता है कि आखिर ज्यूलर्स के पास इतना ज्यादा गोल्ड कहां से आया क्योंकि जितना गोल्ड इम्पोर्ट  होता है, उसकी पूरी जानकारी सरकार के पास होती है। 

ज्यूलर्स के पास करीब 300 टन का गैर-कानूनी गोल्ड स्टाक 
सूत्रों के अनुसार नोटबंदी के दौरान काफी गोल्ड बेच देने के बावजूद भी इस वक्त ज्यूलर्स के पास करीब 300 टन का गैर-कानूनी गोल्ड स्टाक है। इस स्टाक को वे छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए वे गोल्ड को गैर-कानूनी तरीके से बेच रहे हैं ताकि सरकार को इस स्टाक की जानकारी न मिल पाए और न ही उन्हें इस पर टैक्स देना पड़े। इस घपले की जानकारी मिलते ही इंकम टैक्स विभाग ने ज्यूलर्स के खिलाफ सर्च आप्रेशन तेज कर दिया है।

जी.एस.टी. का भी पेंच
अहम सवाल है कि ज्यूलर्स ऐसा क्यों कर रहे हैं। दरअसल सरकार ने यह मंशा जता दी है कि वह 1 जुलाई से गुड्ïस एंड सॢवसेज टैक्स (जी.एस.टी.) लागू करने जा रही हैै। इसकी तैयारियां भी पूरी हो चुकी हैं। जी.एस.टी. लागू होने के बाद ज्यूलर्स को अपना स्टाक घोषित करना होगा और उसके बाद की सभी बिक्री नई टैक्स व्यवस्था के तहत होगी। सरकार को पुराने स्टाक की सही जानकारी न देने के लिए ज्यूलर्स पुरानी ज्यूलरी को या तो कैश में बेच रहे हैं या उसे खाते में दिखाने के लिए फर्जी बिल दिखा रहे हैं। स्टाक की जानकारी देने के साथ इसके इम्पोर्ट और इसके सोर्स की जानकारी भी देनी होगी। 
 

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