जेतली ने कम व नकारात्मक ब्याज दरों के जोखिम को लेकर आगाह किया

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Sunday, October 09, 2016-3:50 PM

वाशिंगटन: भारत ने बैंकिंग प्रणाली में कम और नकारात्मक ब्याज दरों तथा उल्लेखनीय संख्या में ऋण के खराब होने से वैश्विक वित्तीय स्थिरता के समक्ष जोखिम को लेकर आगाह किया है और वृद्धि को गति देने के लिए बही-खातों को दुरूस्त करने का आह्वान किया है।  

वित्त मंत्री अरुण जेतली ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष तथा विश्वबैंक की सालाना बैठक में कहा, ‘‘अव्यवस्थित रूप से निजी कर्ज को कम करने के उपाय से भी वृद्धि प्रभावित हो सकती है। इन जोखिमों से बचाव के लिए प्रतिरोधक क्षमता तैयार कर तथा बही खातों पर ऋण के बोझ को कम कर नीति मसौदे को मजबूत करना होगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘बैंलेस-शीट को दुरूस्त करने के लिए उत्पाद एवं श्रम बाजार सुधारों से लाभ तथा जोखिम प्रबंधन गतिविधियों को मजबूत बनाने से किसी भी प्रतिकूल परिस्थति से निपटने की क्षमता और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।’’ 

अपने संबोधन में जेतली ने कहा कि विदेशों में वित्त पोषण की स्थिति आसान होने तथा जिंसों के दाम में सुधार से एेसा लगता है कि वित्तीय स्थिरता सुधरी है। उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि वैश्विक वित्तीय स्थिरता के लिये जोखिम बना हुआ है जिसका कारण निम्न और नकारात्मक ब्याज दर, निजी कर्ज का अधिक होना तथा बैंक प्रणाली में बड़ी संख्या में ऋणों का खराब होना है।’’ जेतली ने चेतावनी देते हुए कहा कि लोक-लुभावन और अलग थलग करने की सोच से वैश्विक व्यापार में और कमी आ सकती है। उन्होंने वैश्विक वृद्धि को आगे बढ़ाने के लिए बहुपक्षीय प्रयासों की वकालत की।  

वित्त मंत्री जेतली ने कहा, ‘‘कुल मिलाकर देखा जाए तो भारत की अच्छी वृद्धि के साथ उभरते बाजार और विकासशील अर्थव्यवस्थाआें (ईएमडीईएस) ने विकसित देशों के मुकाबले अच्छा प्रदर्शन किया है। हालांकि कमजोर वैश्विक मांग से चुनौतीपूर्ण वृहत आर्थिक स्थिति तथा जिंसों से आय में कमी के कारण उत्पन्न कठिनाइयों से ईएमडीईएस में परिदृश्य पूर्व के मुकाबले असंतुलित और सामान्य तौर पर कमजोर बना हुआ है।’’ उन्होंने कहा कि विकसित अर्थव्यवस्थाआें में लंबे समय तक उदार मौद्रिक नीति का ईएमडीईएस के लिए गंभीर प्रभाव होगा।  

जेतली के अनुसार इस बात को लेकर भी चिंता है कि अमरीकी मौद्रिक नीति के सामान्य होने से वैश्विक वित्तीय बाजार उतार-चढ़ाव तथा ईएमडीईएस को पूंजी प्रवाह पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाआें में केंद्रीय बैंकों को मौद्रिक नीति सामान्यीकरण से उत्पन्न वित्तीय स्थिरता जोखिम को ध्यान में रखना चाहिए। जेतली ने कहा कि वैश्विक वित्तीय और आर्थिक स्थिरता को लेकर जोखिम बढऩे से आई.एम.एफ. और विश्वबैंक के कामकाज पर प्रभाव पड़ता है। यह प्रभाव विशेष रूप से उनके संसाधनों की मांग बढऩे की संभावना के संदर्भ में है।  उन्होंने कहा कि दोनों वित्तीय संस्थानों के पास पर्याप्त संसाधन होना चाहिए ताकि टिकाऊ विकास लक्ष्य को लेकर विकास की महत्वकांक्षा के व्यापक फलक को देखते हुए जरूरतों को पूरा किया जा सके। जेतली ने कहा कि पर्याप्त ढांचागत सुविधा, रोजगार, शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाआें से जुड़े विकासात्मक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए वित्त के अंतर को पाटने के साथ संकट को दूर करने और संघर्ष को रोकने के लिए अरबों डॉलर की जरूरत है।  
 


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