मोदी सरकारः पिछले तीन सालों में आर्थिक मोर्चे मे हुए ये बदलाव

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Wednesday, May 17, 2017-12:43 PM

नई दिल्लीः मोदी सरकार को 3 साल पूरे हो चुके है। इस बीच सरकार ने कई तहर के अभियान चलाए, जो काफी हर तक कामयाब भी हुए। मोदी द्वारा बनाई गई जन-धन योजना, बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं, उज्जवला योजना, गोलड स्कीम, ब्लैक मनी के खिलाफ शुरु की गई नोटबंदी आदि ने सभी को राहत पंहुचाई, पर कुछ लोग इससे परेशान भी हुए। सरकार बनने से पहले पॉलिसी पैरालिसिस, अटके प्रॉजेक्ट्स, असमंजस, ये कुछ ऐसे शब्द थे देश मे छाए हुए थे। लेकिन मोदी सरकार के तीन साल गुजरने के बाद धारणा पूरी तरह बदल चुकी है। पहले दो साल पीएम मोदी का टारगेट सिर्फ आर्थिक 'मरम्मत' था। पिछले तीन सालों में आर्थिक मोर्चे मे कई तरह के बदलाव हुए हैं।

निवेश पर रहा जोर
सरकार का जोर शुरुआत से निवेश पर रहा है लेकिन भारत में निवेश के लिए इन्वेसटर्स का भरोसा जीतना सबसे ज्यादा जरूरी था। पर्यावरण मंत्रालय और अन्य विभागों से समय पर क्लीयरेंस न मिलने के चलते यूपीए सरकार में कई बार निवेश को झटका लगा, इसी मोर्चे पर पी.एम. मोदी की सरकार कोई समझौता नहीं चाहती थी। यहां तक कि प्राकृतिक सम्पदा को बांटने के लिए भी पारदर्शी तरीके अपनाए गए। फाइलों की मॉनिटरिंग, और उनके मूवमेंट पर पूरा ध्यान रखा गया ताकि क्लीयरेंस की वजह से कोई भी प्रॉजेक्ट न अटक जाए।
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नई 'नीति' से की शुरुआत
नेहरू के जमाने के योजना आयोग को खत्म कर पी.एम. मोदी ने थिंक टैंक नीति आयोग बनाया। इसके अलावा 2017-18 में रेल बजट को अलग से पेश किया जाना भी खत्म कर दिया और आम बजट को जल्दी पेश किए जाने की शुरुआत की। मोदी सरकार ने ऐसा फ्रेमवर्क तैयार किया है जो डिलिवरी पर टिका है।
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पुरानी करंसी को बदला कागज के टुकड़ों में 
पी.एम. नरेंद्र मोदी ने देश की 86 प्रतिशत करंसी को एक रात में कागज के टुकड़ों में बदल दिया था। नोटबंदी को सरकार के एक मजबूत कदम की तरह देखा गया। 2016-17 में टैक्स देने वालों में एक करोड़ लोगों को इजाफा हुआ है जिसे नोटबंदी के असर की तरह देखा जा रहा है। नोटबंदी का उद्देश्य कैशलेस इकॉनमी भी बताया गया। जिस ओर सरकार तेजी से कदम बढ़ा रही है। 
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बिजेनस के रास्ते किए आसान
2014 में किसी कंपनी की रजिस्टर कराने में 7+5 दिन लगते थे। अब 2017 में आप एक दिन में कंपनी कानूनी रूप से खड़ी कर सकते हैं। इसके साथ ही आप PAN और टैक्स आइडेंटिफिकेशन नंबर भी तुरंत ले सकते हैं। आयातकों और निर्यातकों को सिंगल पोर्टल पर सिंगल फॉर्म भर कर कई मंत्रालयों से क्लियरेंस मिल जाता है। PunjabKesari
कड़े व मजबूत कदम उठाए
कमजोर व्यापक आर्थिक संकेतकों ने भारत को ब्राजील, इंडोनेशिया, तुर्की, और दक्षिण अफ्रीका के साथ 'नाजुक पांच' में जोड़ दिया। ये सभी 5 मंदी की कगार पर, कम वृद्धि, और बड़े घाटे की परेशानी को झेल रहे थे। इसके बाद भारत ने आर.बी.आई. की ब्याज दरों में कटौती करने के लिए कई कड़े कदम उठाए। भारत के इन प्रयासों को बल मिला और मोदी सरकार ने आर्थिक मोर्चे पर अच्छा प्रदर्शन किया।

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