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नोटबंदी का असर, 99% क्षेत्र में नहीं बढ़ेंगे प्रॉपर्टी के रेट

  • नोटबंदी का असर, 99% क्षेत्र में नहीं बढ़ेंगे प्रॉपर्टी के रेट
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Wednesday, January 11, 2017-1:34 PM

इंदौरः नोटबंदी और बदलते नियमों का सीधा असर प्रॉपर्टी कारोबार पर भी देखने को मिलेगा। अप्रैल में लागू होने वाली कलैक्टर गाइडलाइन में फिलहाल जिले के 99 फीसदी इलाकों में रेट नहीं बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। वहीं अफसरों ने ये बात भी स्पष्ट कर दी है कि किसी भी इलाके में रेट घटाए भी नहीं जाएंगे। सिर्फ उन्हीं जगह रेट बढ़ सकते हैं, जहां अप्रैल तक 2 से ज्यादा रजिस्ट्री कलेक्टर गाइडलाइन से ज्यादा कीमत पर देखने मिलेगी। जो लोग सोच रहे हैं कि आने वाले महीनों में कम कीमत पर प्लॉट या मकान खरीद लेंगे तो ऐसा बिलकुल भी नहीं है। ये बिल्डर या प्रॉपर्टी बेचने वाले पर निर्भर करेगा कि वो रेट कितना घटाता है।

इसलिए नहीं घटेंगे रेट
-पंजीयन विभाग का नियम कहता है कि यदि किसी इलाके में कलेक्टर गाइडलाइन के रेट से कम कीमत पर रजिस्ट्री की जाए तो उस जगह के दाम घटाए जा सकते हैं, लेकिन अभी तक ऐसा एक भी मामला विभाग के सामने नहीं आया जिसमें बेचने वालों ने गाइडलाइन के रेट से कम कीमत पर रजिस्ट्री कराई हो।

-एक बात इससे तय हो गई कि मकानों, डुपलेक्स, फ्लैट की कीमतों में बहुत गिरावट नहीं होगी। जिस बिल्डर का प्रोजेक्ट है, वही कीमत घटाकर बेच सकता है। उसमें भी कलेक्टर गाइडलाइन के तय रेट से नीचे कोई बेचना नहीं चाहता क्योंकि एक बार रेट उस जगह के घटे तो फिर उसी आधार पर गाइडलाइन तय कर दी जाएगी।

रेट बढ़ने वाले इलाके कम
विभाग अभी जिले के सभी शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में इस बात का आकलन कर रहा है, जहां दो या इससे ज्यादा रजिस्ट्री की गई हैं। वहीं बिल्डरों के नए प्रोजेक्ट जिन इलाकों में शुरू होने वाले हैं, वहां भी 2 से 5 प्रतिशत या इससे ज्यादा रेट बढ़ाए जा सकते हैं। इन जगहों में निरंजनपुर, लसूड़िया, निपानिया, राजेन्द्र नगर, सुपर कॉरिडोर, स्कीम 136, स्कीम 71 जैसे कुछ इलाके हो सकते हैं।

बदलते नियमों की दहशत
नोटबंदी का समय तो निकल गया लेकिन कालेधन को लेकर केंद्र सरकार के बदलते नियमों को लेकर भी प्रॉपर्टी में निवेश कम होता जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक बायपास और हाईवे किनारे कुछ बड़े बिल्डर नोटबंदी में प्रॉपर्टी खरीदने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन सरकार के बेनामी संपत्ति वाले नियमों ने उन्हें ऐसा नहीं करने दिया। सौदे के लिए दोनों पार्टियों ने दस्तावेज तक तैयार करा लिए थे। उनके सौदे भी नहीं हो सके, जो कम रेट पर अब प्रॉपर्टी बेचना चाह रहे हैं, क्योंकि एक ही व्यक्ति के नाम पर दो से ज्यादा प्रॉपर्टी वाला नियम उनके आड़े आने लगा है।

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