मकान क्रेताओं की याचिका पर सरकार व आम्रपाली को नोटिस

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Saturday, October 07, 2017-11:32 AM

नई दिल्लीः उच्चतम न्यायालय ने 100 से अधिक क्रेताओं की याचिका पर सरकार तथा आम्रपाली समूह की दो कंपनियों से जवाब मांगा। इन क्रेताओं ने याचिका में अनुरोध किया है कि बैंकों व वित्तीय संस्थानों की तरह उन्हें भी प्रतिभूति जमानती ऋणदाता मानते हुए उनके हितों की रक्षा की जाए। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा व न्यायाधीश ए एम खानविलकर व न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने केंद्र सरकार व आम्रपाली समूह को नोटिस जारी करते हुए उनसे चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
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आम्रपाली के इन मकान क्रेताओं को न तो प्रस्तावित फ्लैटों का कब्जा मिला और न ही पैसा वापस मिला। इन क्रेताओं ने उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में आम्रपाली सेंचुरियन पार्क लॉ राइज प्रोजेक्ट, आम्रपाजली सेंचुरियन पार्क टैरेस होम्स व आम्रपाली सेंचुरियन पार्क ट्रोपिक्ल गार्डन में मकान बुक करवाया था। कंपनी को लग्भग 40 टावरों में 5000 से अधिक फ्लैट बनाने थे। विक्रम चटर्जी व 106 अन्य द्वारा दाखिल याचिका में नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (एन.सी.एल.टी.) के उस आदेश को खारिज करने का आग्रह किया गया है जो कि उसने बैंक आफ बड़ौदा की याचिका पर दिया था। याचिका में आग्रह किया गया है कि या तो मकान क्रेताओं को बैंक व वित्तीय संस्थानों के समान ही माना जाए अथवा दिवालिया संहिता के प्रावधानों को संविधान में दिए गए जीने और समानता के अधिकार जैसे मूल अधिकारों का उल्लंघन करने वाला ठहराया जाए।   

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