अब सस्ते में मिलेगा अमरीकी ‘लैग पीस’ का मजा

Edited By ,Updated: 25 Feb, 2017 11:09 AM

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नाराज भारतीय पोल्ट्री फैडरेशन ने अमरीकी ‘लैग पीस’ चिकन के इम्पोर्ट पर रोक लगाने की मांग की है ...

नई दिल्ली: नाराज भारतीय पोल्ट्री फैडरेशन ने अमरीकी ‘लैग पीस’ चिकन के इम्पोर्ट पर रोक लगाने की मांग की है और तर्क दिया है कि अमरीका में मुर्गों को पोर्क फैट यानी सूअर की चर्बी खिलाई जाती है, इसलिए उसके इम्पोर्ट को रोका जाना चाहिए। बताते चलें कि अमरीका में चिकन लैग की खपत कम है, जिसके चलते इसके भारत को इम्पोर्ट की परमिशन मिल सकती है। अब भारत सरकार को अमरीकी पोल्ट्री प्रोडक्ट के इम्पोर्ट पर लगा बैन हटाना होगा। डब्ल्यू.टी.ओ. ने भारत की ओर से अंडों और पोल्ट्री मीट के इम्पोर्ट पर लगाए गए बैन को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नियमों के खिलाफ पाया है। भारत को इस पर कुछ ही महीनों के भीतर ठोस गाइडलाइन लानी है।

पोल्ट्री प्रोडक्शन की लागत यू.एस. में कम
देश के पोल्ट्री कारोबारियों को डर है कि अमरीकी चिकन का इम्पोर्ट शुरू हुआ तो उनके धंधे पर चोट पड़ेगी और अब कारोबारी इससे नाराज हैं तथा इसके विरोध का हर मुमकिन तरीका आजमा रहे हैं। अमरीका में मुर्गों की अच्छी बढ़त के लिए फीड में जी.एम. कोर्न और सोया का इस्तेमाल होता है जबकि भारत में जी.एम. कॉर्न के इस्तेमाल पर बैन है। यही वजह है कि पोल्ट्री प्रोडक्शन की लागत यू.एस. में भारत के मुकाबले कई गुना कम आ रही है और मुर्गों की बढ़त भी भारत से ज्यादा होती है। अमरीका में चिकन लैग की खपत कम है, इसलिए संभावना है कि वहां का लैग पीस भारत में औने-पौने दाम पर डंप किया जाएगा। जाहिर है गैर-बराबरी के माहौल में अगर अमरीकी मुर्गे सस्ते में बेचे जाने लगे तो पोल्ट्री कारोबार को खतरा हो सकता है।

भारत में कोल्ड स्टोरेज का इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित नहीं
हालांकि यू.एस. से चिकन के इम्पोर्ट में कई तरह की दिक्कतें भी हैं। चिकन लैग पीस फ्रोजन फोर्म में आएंगे, जबकि भारत में कोल्ड स्टोरेज का इंफ्रास्ट्रक्चर इतना विकसित नहीं है। फिर भी कारोबारी यह चाहते हैं कि सरकार इम्पोर्ट की गाइडलाइंस में कोई कठोर शर्त लगाए जिससे कि खतरा कम हो सके।

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