मार्कीट बिगाड़ने वाले शुल्क दरों पर लगाम लगेः ओला

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Monday, November 07, 2016-1:23 PM

नई दिल्ली: एप आधारित टैक्सी बुकिंग सेवा प्रदाता ओला ने राइवल ऐप बेस्ड कंपनियों पर निशाना साधा है। अोला ने कहा है कि सरकार को भारी पूंजी के जरिए बाजार बिगाड़ने पर रोक लगाने के लिए नियम बनाने चाहिए। यह जानकारी ओला के मुख्य परिचालन अधिकारी प्रणय जिवराजका की ओर से दी गई है।

उन्होंने बताया कि सभी कंपनियों के अस्तित्व को ध्यान में रखते हुए प्रणाली में अनाप शनाप धन लगाए जाने तथा बाजार बिगाड़ने वाले शुल्क दरों पर लगाम लगाने के लिए  रेग्युलेशन लाने की जरूरत है। अपनी प्रतिस्पर्धी उबर का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि विदेशी पूंजी का इस्तेमाल केवल बाजार खराब करने वाले शुल्क दरों के लिए नहीं होना चाहिए।

ओला की तरफ से आई यह प्रतिक्रिया इसलिए दिलचस्प है क्योंकि ओला को साफ्टबैंक, डीएसटी ग्लोबल, एस्सेल पार्टनर्स सहित कई प्रमुख निवेशकों से 1.2 अरब डॉलर का विदेशी पूंजी निवेश मिला है। कंपनी दूसरे दौर में और भी निवेश हासिल कर रही है। वहीं और फंड जुटाने के लिए दूसरे सोर्सेज की भी तलाश जारी है। इस बात पर ओला का कहना है कि हम फॉरेन कैपिटल का इस्तेमाल मार्कीट की सस्टेेनेेबिलिटी के लिए करते हैं, न कि मार्कीट बिगाड़ने के लिए।

ओला का कहना है कि कंपनियां फॉरेन कैपिटल का इस्तेमाल कर कस्टमर्स को कई तरह के ऑफर देती हैं। सस्ती राइड ऑफर से मार्कीट खराब करती हैं। उदाहरण देते हुए बताया कि ओला का प्राइस राइवल उबर की तुलना में औसतन 20 फीसदी ज्यादा है। इस वजह से जहां उबर की मौजूदगी है, वहां बिजनेस प्रभावित होता है।

ओला ने बीते साल नवंबर महीने में साफ्ट बैंक से 500 मिलियन डॉलर का निवेश प्राप्त किया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ओला देश की तीसरी सबसे मूल्यवान स्टार्टअप है जो कि इस चरण में 60 करोड़ डालर जुटाना चाहती है।


 


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