भारत की फार्मा कम्पनियों का एक्सपोर्ट हो सकता है कम

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Wednesday, November 09, 2016-7:47 AM

जालंधरः भारत में शेयर बाजार और आर्थिकता की दिशा को आज शाम होने वाले अमरीका के राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे तय करेंगे। गौरतलब है कि 2007-08 में भारत ने अमरीका को 959 मिलियन डॉलर के फार्मा प्रोडक्ट का एक्सपोर्ट किया था, जबकि 2014-15 में यह एक्सपोर्ट बढ़कर 3769 मिलियन डॉलर हो चुका है और इसमें करीब 4 गुणा का इजाफा हुआ है। 

ट्रम्प के जीतने पर भारत में होंगे ये असर 
यदि अमरीका में ट्रम्प जीतते हैं तो इससे भारत के फार्मा सैक्टर के अलावा आई.टी. सैक्टर को तगड़ा झटका लग सकता है। माना जा रहा है कि ट्रम्प गद्दी संभालते ही राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा हैल्थ सैक्टर में चलाई जा रही ओबामा केयर नाम की योजना पर पुनर्विचार कर सकते हैं। ऐसा होने की स्थिति में भारत की फार्मा कम्पनियों को काफी नुक्सान होगा। ओबामा के शासनकाल में अमरीका को भारत का फार्मा एक्सपोर्ट काफी बढ़ा है। इसके अलावा डोनाल्ड ट्रम्प घरेलू प्रोफैशनल्ज को जॉब्स देने की बात कर रहे हैं और इसके लिए उन्होंने वीजा नाम्र्स में बदलाव की वकालत भी की है। इसका सीधा असर भारत की आई.टी. कम्पनियों पर होगा। अमरीका का होने वाला सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट घट सकता है। इसके अलावा भारत के आई.टी. पेशेवरों को वीजा संबंधी परेशानियां भी आ सकती हैं। ट्रम्प के जीतने की स्थिति में अमरीकी फैडरल रिजर्व की पॉलिसीज में भी बदलाव हो सकता है जिसका असर दुनिया भर में सोने और क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ेगा और भारत भी इसके असर से बाहर नहीं रह सकेगा। 

हिलेरी के जीतने पर मिले-जुले नतीजे
यदि इस चुनाव में हिलेरी जीतती हैं तो भी भारत के लिए मिले-जुले नतीजे ही आने वाले हैं। हालांकि हिलेरी ने आर्थिकता को लेकर ऐसा कोई बयान नहीं दिया जिसका भारत पर सीधा असर पड़े लेकिन यदि हिलेरी घरेलू मोर्चे पर जॉब्स में रिफार्म की तरफ बढ़ती हैं तो इसका असर भारत पर भी पड़ेगा।


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